प्रस्तावित हसेरन तहसील के विरोध में वकीलों की हड़ताल 9वें दिन मंगलवार को भी जारी रही। गुस्साएं वकीलों ने तहसील दिवस पर पहुंचे अधिकारियों और कर्मचारियों को सभागार में ताला डालकर बंधक बना लिया। दिया। अफसरों तक पहुंचकर फरियादी अपनी शिकायतें नहीं दर्ज करा पाए। अफसरों ने भी वकीलों के आक्रोश को देखते हुए ताला खुलवाने का प्रयास नहीं किया। तहसील दिवस का समय खत्म होते ही खुद वकीलों ने ताला खोलकर सभी अफसरों को जाने दिया।
एसडीएम राजेश कुमार यादव के नेतृत्व में मंगलवार को तहसील दिवस का आयोजन था। पुलिस क्षेत्राधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, बीडीओ उमर्दा समेत कई विभागों के अफसर सुबह दस बजे सभागार में पहुंच गए। करीब 45 मिनट तक तहसील दिवस का काम ठीक-ठाक चला। कुछ फरियादियों की अफसरों ने शिकायतें भी सुनीं। इसी दौरान वकीलों का हुजूम एकत्र होकर नारेबाजी करता हुआ सभागार के सामने पहुंचा। वकीलों ने तहसील दिवस के आयोजन पर आपत्ति जताते हुए सभागार का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया।
कुछ वकीलों ने दरवाजे पर ताला भी जड़ दिया। सभागार के बाहर शिकायतों के पंजीकरण के लिए बैठे कर्मचारियों को भगा दिया। तालाबंदी के बाद सभी वकील एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। वकीलों ने बाद में किसी भी फरियादी को सभागार के आसपास के फटकने नहीं दिया। उधर, सभागार में कैद एसडीएम, सीओ समेत किसी भी अफसर ने न तो बाहर निकलने का कोई प्रयास किया और न ही ताला खुलवाने का।
जैसे ही दोपहर के दो बजे का समय हुआ तो वकीलों ने खुद ही सभागार का ताला खोल दिया। ताला खुलते ही सभी अफसर बाहर निकलकर चले गए। इस दौरान जब एसडीएम से पूछा गया तो उनका कहना था कि वह अपना काम कर रहे थे। वकील अपना काम कर रहे थे। तहसील दिवस में करीब डेढ़ दर्जन फरियादियों की शिकायतें सुनी गई हैं। धरना प्रदर्शन में लायर्स बार के अध्यक्ष भूपेंद्र वैस, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश शुक्ला के अलावा संजय शुक्ला, परमानंद तिवारी, कलक्टर सिंह यादव, कमलेश पाल, सतीश राजपूत, अनिल वर्मा, अंशुमान कटियार, मनोज राजपूत, संजीव तिवारी, राजा अवस्थी, दीपू यादव, सुरेंद्र सिंह यादव, देवेंद्र राजपूत, वैभव तिवारी, रामरतन पाल, राजेश श्रीवास्तव, नीरज त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।