ऐतिहासिक सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर परिसर में
चल रहे शतचंडी यज्ञ और भागवत कथा के दौरान शनिवार को जनसैलाब उमड़ पड़ा।
पूरे दिन मंदिर परिसर जयकारों से गूंजता रहा।
हवन कुंड में आहुतियां देकर
एक ओर जहां समाज के सभी लोगों को सुख, शांत व समृद्धि की कामना की गई, वहीं
कथा के दौरान धर्म के रास्ते पर चलने व पुण्य कार्य करने का संकल्प लिया
गया। व्यास गोपालकृष्ण ने भागवत कथा सुनाते हुए भगवान कृष्ण की बाल
लीलाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
वकासुर वध, काली मर्दन, गोवर्धन पूजा,
गोपियों संग रासलीला एवं श्रीकृष्ण के मथुरा गमन के प्रसंग सुनाए।
उन्होंने बताया कि बंशी को भगवान इसलिए ओठों पर रखे हैं, क्योंकि प्रभु
जैसा बोलते हैं वैसा ही बंशी बोलती है। उन्होंने कहा कि भगवान पर विश्वास
रखने वाले के कष्ट अवश्य दूर होते हैं।
जब जब धरती पर अत्याचार बढ़ते हैं
तब तब भगवान पापियों का अंत करने के लिए अवतार लेते हैं। वहीं यज्ञ के
दौरान संत स्वामी उपेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों के
आयोजन से समाज में शांति व अच्छाई बढ़ती है। सत्कर्म करने का भाव लोगों के
मन में जागृत होता है।
बुरे विचार मन से दूर होते हैं। नेकी के रास्ते पर
चलने की नसीहत मिलती है। कहा कि जो लोग धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते है,ं
उन्हें ईश्वर की कृपादृष्टि प्राप्त होती है। वहीं कथा, यज्ञ, सत्संग
सुनने का अवसर भी प्रभु की कृपा से ही मिलता है।