कन्नौज। अब पशु अन्ना छोड़ने वालों की आसानी से पहचान हो जाएगी। पशु पालन विभाग पालतू जानवरों के काम में यूनिक आईडी वाला टप लगा रहा है। इस टप में बार कोड भी है। इसको स्कैन करते ही पता चल जाएगा कि पशु किसका है। पशु अन्ना करने वाले पर प्रशासन जुर्माना लगाएगा। इसके अलावा पशुओं के कितने टीके लगे हैं इसका भी ब्योरा बार कोड में दर्ज होगा।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार दो वर्ष पहले जिले में 6.65 लाख पालते पशु हैं। इन पशुओं के कान में यूआईडी नंबर वाला टप (टैगिंग) लगाया जा रहा है। करीब 5.78 लाख पशुओं को टप लगाने का काम पूरा हो चुका है। 15 मार्च तक सभी पशुओं की टैगिंग का काम पूरा होना है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शाल्या ने बताया कि टप लगाने का काम 15 नवंबर से चल रहा है। अभी गाय और भैंस की टैगिंग की जा रही है। भेड़, बकरी, सुअर, कुत्तों और पोल्ट्री की टैगिंग बाद में की जाएगी।
डॉ. संजय ने बताया कि टप में यूनिक नंबर लिखा होगा। इस नंबर को पोर्टल पर अपडेट कर दिया जाएगा। इस नंबर पर पोर्टल पर पशु को पूरा ब्योरा दर्ज किया जाएगा। मसलन गोवंशीय या महिवंशीय पशु का मालिक कौन है। पशु के कितने बच्चे हुए, कितने जीवित हैं और वह कहां हैं। पशु को बेचने पर मालिक का नाम निकटतम पशु चिकित्सालय में जाकर पोर्टल पर बदलवाना भी पड़ेगा।
पशु के कान में लगे टप को स्कैन करके पता चल जाएगा कि पशु किसका है। पशु पालन विभाग, निकाय और पुलिस के अधिकारी टप को स्कैन करके पशु के मालिक का पता लगा लेंगे। इसके बाद पशु को अन्ना करने वाले पशु पालक पर जुर्माने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। (संवाद)
वर्ष 2017 में बीमा करने पर जानवर को टप लगाया जाता था। उसमें भी पशु का पूरा ब्योरा होता था लेकिन तब उसमें बार कोड नहीं था। इसलिए बिना रिकार्ड देखे पशु की जानकारी नहीं हो पाती थी। अब टप के बार कोड को अपने मोबाइल से स्कैन करके कोई भी पशु के बारे में जानकारी कर सकेगा। टप लगाने के साथ पशुओं का वैक्सीनेशन भी किया जा रहा है। टैगिंग का काम पूरा करके अन्ना जानवरों की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि दूध देने वाले पशुओं में फुट एंड माउथ का वायरल हो जाता है। इस रोग से पशु को बचाने के लिए भी टीके लगाए जा रहे हैं। इसकी चपेट में आए पशु दूध दूना बंद कर देते हैं। यह वायरस हवा में फैलता है। टीकाकरण का ब्योरा भी यूनिट टप में दर्ज किया जाएगा।
बारकोड टैगिंग के लिए पशु पालक नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करें। वहां पशु पालक का आधार कार्ड देगा होगा। इसके बाद यूनिक टप मुफ्त में लगाया जाएगा।
गोवंशीय 178762
महिवंशीय 399979
कुल 578741