जलालाबाद। जिला कारागार से दो बंदियों, अंकित और डिंपी उर्फ शिवा के फरार होने की घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। इन दोनों फरार बंदियों को स्थानीय स्तर पर जय-वीरू की जोड़ी के नाम से जाना जाता है। दोनों लगातार पुलिस को चकमा देने में सफल हो रही है। पुलिस की पांच टीमें धरपकड़ के लिए कई प्रदेशों की खाक छान रही हैं।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरी घटना का मुख्य सूत्रधार तालग्राम निवासी अंकित है। अंकित का आपराधिक इतिहास मुख्य रूप से ठठिया थाना क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उस पर चोरी, लूट और संगठित अपराध से संबंधित कई मामले पहले से दर्ज हैं। जांच में यह भी पता चला है कि अंकित और डिंपी उर्फ शिवा के बीच जेल के अंदर भी गहरी दोस्ती थी और वे बैरक से निकलने के बाद अक्सर साथ ही रहते थे।
बंदियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए महिला बैरक के पीछे लकड़ियों और कंबलों से बनाई गई रस्सी के सहारे 22 फुट ऊंची दीवार फांदी और खेतों में उतरकर फरार हो गए। इस घटना ने जेल के सुरक्षा तंत्र की पोल खोल दी है। पुलिस ने अंकित और उसके नेटवर्क से जुड़े संभावित ठिकानों पर दबिश तेज कर दी है और क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है। सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बरती जा रही है। एसपी विनोद कुमार ने विश्वास जताया है कि जल्द ही फरार बंदियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले का खुलासा किया जाएगा।
बंदियों की शिफ्टिंग और जेल में सुविधाओं का अभाव
इस घटना के बाद जिला कारागार में कैदियों की शिफ्टिंग का कार्य जारी रहा। बैरक नंबर 8 और 10 में बंद कैदियों को अन्य बैरकों में स्थानांतरित किया गया। वहां अंकित और डिंपी उर्फ शिवा रह रहे थे। इस शिफ्टिंग को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ इसे जांच को प्रभावित करने का कदम मान रहे हैं, जबकि जेल प्रशासन सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहा है। इस प्रक्रिया में लगभग 200 बंदी प्रभावित हुए हैं और कई को तन्हाई बैरक में रखा गया है।
जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर तब और सवाल खड़े हो गए जब यह बात सामने आई कि जिला कारागार में आज भी जैमर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। जैमर के अभाव में मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि जेल कर्मियों को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं है, लेकिन जेल सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मी चोरी-छिपे मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि जेल में जैमर लगा होता, तो संतरी पोस्ट से लेकर गार्डों को मोबाइल नेटवर्क बंद होने से काफी सहूलियत मिलती।