कसबा तालग्राम में 70 के दशक में बना राजकीय पशु चिकित्सालय रखरखाव के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गया है। इससे कर्मचारी और पशुपालक परेशान हैं। उन्हें डर लगा रहता है कि कहीं भवन अचानक गिर न जाए।
किसान राजेंद्र पाल, जीवालाल, महाराम, वीरेंद्र कुमार, रविकुमार ने बताया कि पशुओं के लिए बना अड़गड़ा ध्वस्त हो गया है। पशु पालक जैसे-तैसे इलाज कराने को मजबूर हैं। परिसर में पेयजल के लिए लगा एकमात्र हैंडपंप भी खराब हो गया है। इस कारण दूरदराज से आने वाले पशुपालकों व किसानों को पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ रहा है।
चहारदीवारी न होने से आवारा जानवर परिसर में आए दिन लोगों को परेशान करते हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दो साल से मेडिकल अवकाश पर चल रहा है, जिस कारण यहां की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। वहीं पैरावेट मानदेय का भुगतान न होने के कारण काम से कन्नी काट रहे हैं। इस कारण पशुओं को होने वाला टीकाकरण कार्य भी प्रभावित होता है।
पशुपालकों का कहना है कि तालग्राम राजकीय पशु चिकित्सालय से क्षेत्रीय गांव किशनपुर बमरौली, पिड़ारीखेड़ा, रनवां, अधौआ, बनियानी, कुशलपुरवा, महानगर, पलरी, मधइया, मधईनगला, मुंडाला, तिसौली, बिरौली, भोजापुर, त्योर, रसूलाबाद आदि एक सैकड़ा गांव जुड़े हैं। इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भेड़ पालन व बकरी पालन होता है। सुअर और मुर्गी पालक किसानों के लिए भी इलाज के लिए मात्र यही एक अस्पताल है।
ग्रामीणों ने बताया कि छतें चिटकी हैं। परिसर में छाया का इंतजाम भी नहीं है। बकरों के लिए बना बाड़ा व सुकरवारा भी बुरी तरह से ध्वस्त पड़ा है। स्टाफ के नाम पर एक डाक्टर, एक फार्मासिस्ट के अलावा दो पैरावेट श्याम सिंह व प्रदीप ही कार्यरत हैं। पशु चिकित्सकों ने डीएम से इस पशु अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरवाने की गुहार लगाई है।
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अपने स्तर से कई बार उच्चाधिकारियों को इन परेशानियों से अवगत कराया गया है। खंड विकास अधिकारी को भी लिखकर दे चुके हैं। विभाग के पास रखरखाव के लिए कोई बजट नहीं है। दवा भी खरीदने का अधिकार उनके पास नहीं है। भवन किसी भी समय ढह सकता है।
- अरविंद कुमार त्रिपाठी, पशु चिकित्साधिकारी