पैगंबरे इस्लाम के प्रति टिप्पणी से भड़के मुसलमान
सदरजहां के मैदान में एकत्र हुए और फिर शहर में जुलूस निकालने की तैयारी
करने लगे। इसे रुकवाने को पुलिस का पसीना छूट गया। दो घंटे की कवायद के बाद
जुलूस निकालने का कार्यक्रम रद हुआ और फिर यहीं पर एसडीएम को ज्ञापन देकर
हिंदू महासभा के अध्यक्ष कमलेश तिवारी का पुतला आग के हवाले कर दिया गया।
शुक्रवार
को नमाजे मगरिब मुस्लिम समुदाय के लोग भारी तादात में सदरजहां के मैदान
में एकत्र हुए। तमाम युवक हिंदू महासभा अध्यक्ष के खिलाफ नारे लिखी
तख्तियां लहराते हुए फांसी पर चढ़ाने की मांग कर रहे थे। इसी दौरान युवकों
का हुजूम शहर में जुलूस निकालने पर आमादा हो गया।
कोतवाल अरविंद मोहन
जायसवाल ने पंचायत चुनाव के चलते धारा 144 लगे होने का हवाला देते हुए
जुलूस नहीं निकालने को कहा। इस पर युवकों से काफी देर तक तीखी बहस हुई।
आखिरकार पूरे शहर की बजाय मोहल्ला सैयदबाड़ा की मस्जिद तक जुलूस ले जाने की
मांग होने लगी।
युवा मुस्लिम नेता मो. कामरान ने बमुश्किल सभी को समझा कर
शांत किया और फिर सदरजहां के मैदान में ही राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन
एसडीएम महेश प्रसाद दीक्षित को दे दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि
आरएसएस के कुछ गैर जिम्मेदार व्यक्तियों एवं हिंदू महासभा के अध्यक्ष कमलेश
तिवारी ने पैगंबरे इस्लाम के प्रति निहायत अभद्र टिप्पणी की है, जिसकी
भर्त्सना करते हैं और हुकूमते हिंद से मुतालिबा करते हैं कि देशद्रोह का
मुकदमा चलाकर मृत्युदंड दिया जाए।
इस दौरान कारी शमसुल कमर, उमर फारूक
बंटी, मो. राशिद, मो. अजमल, शाहिद रजा, डॉ. नसीम, हाफिज आरिफ, मौलाना
जियाउल हक, फहीम खां, मुफ्ती इफ्तिखार, मो. इमरान आदि मौजूद थे। उधर, जुलूस
निकालने की भनक पहले से ही प्रशासन को लग गई थी। इसके लिए पुलिस और
प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया था। पुलिस विभाग ने नगर के कई मुस्लिम
नेताओं को नोटिस भी जारी किए थे। जिसमें जिले में धारा 144 लागू होने का
हवाला दिया गया था।