एक तरफ पति की मौत का गम, वहीं दूसरी तरफ प्रधानी के
चुनाव में मिली जीत की खुशी। मगर यह खुशी पति के मौत के गम को दूर नहीं कर
सकी। घर में बेसुध पड़ी कमलेश कुमारी को जब बताया गया कि उसके पति के अंतिम
इच्छा पूरी हो गई और वह गांव की प्रधान बन गई।
श
कमलेश कुमारी की आंखों में
चमक तो आई मगर पति के बिना यह खुशी सहेज नहीं हो पाई और देखते ही देखते
आंखें भर आई। बड़ी मुश्किल से उसका देवर जीत की घोषणा के बाद मतगणना
स्थल पर लाया। यहां भी वह दहाड़े मारकर रोने लगी तो अन्य महिलाओं ने ढांढस
बंधाया और पति की इस अंतिम इच्छा पूरी होने पर उसका हौसला भी बढ़ाया।
ग्राम
टड़हा निवासी कमलेश कुमारी ग्राम पंचायत प्रेमपुर से प्रधान पद की
प्रत्याशी थी। मतदान के दिन एक दिसंबर को जहां सभी मतदान में मशगूल थे। तभी
कमलेश कुमारी के पति प्रवेश सिंह उर्फ पिंटू की अचानक मौत हो गई। पति की
मौत के बाद वह चुनाव भूल गई। परिजन और गांव के अन्य लोग गम में डूब गए।
पति
की मौत के 13वें दिन रविवार को मतगणना शुरू हुई। जिसमें उसका देवर
सतेंद्र सिंह एजेंट था। मतगणना के बाद घोषित चुनाव परिणाम में कमलेश कुमारी
ने 282 मत पाकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी रमेश को 12 मतों से हरा दिया। जीत
की घोषणा होते ही एजेंट बने उसके देवर ने भाभी को जीत की जानकारी दी।
प्रधान पद पर जीत हासिल होने की जानकारी होते ही उसके आंखों से आंसुओं की
धारा बह निकली। परिवार की अन्य महिलाओं ने किसी तरह उसे ढांढस बंधाते हुए
मतगणना स्थल पर लेकर आईं और उसे जीत का प्रमाणपत्र दिलाया। प्रधान पद के
महत्वपूर्ण चुनाव में जीत हासिल करने के बाद भी कमलेश कुमारी के चेहरे पर
जीत की बजाय पति की मौत का दुख स्पष्ट झलक रहा था।
रुंधे गले से उसका कहना
था प्रधान पद पर जीत हासिल कर भले ही उसके पति की अभिलाषा पूरी हो गई हो,
पर उनकी मौत का गम वह कभी नहीं भूला पाएगी। उसके लिए यह जीत कोई मायने नहीं
रखती, पर इस जीत के सहारे वह ग्राम सभा के लोगों की सेवा कर अपने पति के
संकल्पों को पूरा करने का प्रयास जरूर करेगी।