कन्नौज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंचार्ज प्रधानाध्यापकों की वेतन संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालती आदेश का पालन न होने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना है कि पहले जारी आदेश का बीएसए ने जानबूझकर पालन नहीं किया है। यह अवमानना का मामला बनता है। हालांकि, कोर्ट ने बीएसए को राहत देते हुए आदेश के पूर्ण अनुपालन के लिए दो महीने का अतिरिक्त और अंतिम अवसर प्रदान किया है।
सदर बाजार सौरिख निवासी विकास कुमार यादव ने बताया कि 16 सितंबर 2025 को दायर रिट याचिका में हाईकोर्ट द्वारा एक आदेश पारित किया गया था, जिसमें कहा गया था कि तीन साल से अधिक समय से इंचार्ज प्रधानाध्याकों को प्रधानाध्यापक का वेतन दिया जाए। लंबे समय बाद भी जब इस आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया, तो शिक्षकों की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई।
28 सितंबर को इस अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्थिति को गंभीर माना। न्यायमूर्ति विकास बुधवार की अदालत के आदेश के अनुसार दो महीने की यह अवधि 28 सितंबर से नहीं, बल्कि उस दिन से गिनी जाएगी जिस दिन पूर्व आदेश की प्रमाणित प्रति विपक्षी पक्ष को प्राप्त कराई जाएगी। इसके लिए आवेदक पक्ष को दो सप्ताह के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए पंजीकृत लिफाफे कोर्ट कार्यालय में जमा करने होंगे, ताकि कार्यालय के माध्यम से विपक्षी को प्रति भेजी जा सके।
आदेश न मानने पर दोबारा हाईकोर्ट जाने की छूट
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विपक्षी पक्ष बीएसए को आदेश पालन की जानकारी एक सप्ताह के भीतर आवेदक को देनी होगी। यदि निर्धारित दो महीने की समय-सीमा के भीतर आदेश का अनुपालन नहीं होता है, तो आवेदक पक्ष को पुनः हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने और सख्त कार्रवाई की मांग करने की पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी। वहीं, याचिकाकर्ता महाश्वेता गुप्ता ने बताया कि इस आदेश को लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट भी गई है।