जुमे की नमाज के बाद जिले की मस्जिदों में समानता कोड के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। मुस्लिम समाज के स्थानीय अगुवा समानता कोड से मुल्क को नुकसान पहुंचने की बात कह रहे है। वहीं कन्नौज शहरकाजी ने शीघ्र ही बैठक कर अभियान चलाए जाने की बात कही है।
शुक्रवार की दोपहर मस्जिदों में नमाज अदा की गई। जिसके बाद मिरगांवा की जामा मस्जिद परिसर में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में लगभग 500 लोगों के हस्ताक्षर किए। सभी ने एक स्वर में समानता कोड का विरोध किया है। हस्ताक्षर अभियान में शामिल लोगों में मोहम्मद असलम खां, इशरत खां, शब्बरखां, इकरार खां, हकीब खां, शराफत खां, रईश खां, इरफान खां, मुसीम खां, इमरान खां, शमीम खां, समद खां, मसीउ्ददीन खां, इलियास खां, अशफाक खां, इलियास खां आदि रहे।
शरियत इंसानी नहीं अल्ला का कानून
मौलाना मुफ्ती मतीउद्दीन मिस्वाई ने कहा समानता का कोड मुल्क को नुकसान पहुंचाएगा। हम सभी मुसलमान शरियत के पाबंद है। शरियत इंसानी कानून नहीं बल्कि अल्लाह का कानून है। इसे बदला नहीं जा सकता है।
कयामत तक करेंगे पालन
मौलाना बदरुल हसन ने कहा कुरान की आयत की शक्ल में जो मौजूद है। मुसलमान कयामत तक उसका पालन करेगा। कानून का पालन न करना अल्लाह के प्रति गुनाह होगा।
गुरसहायगंज के मौलाना कारी मतलू ने कहा हिंदुस्तान की हुकूमत देश की तरक्की के कामों को तबज्जों दे। जिससे हिंदुस्तान की आवाम शांति व खुशहाली से विकास कर सके। मजहब में किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।
सदर में हस्ताक्षर अभियान पर हो रहा विचार
शहरकाजी मिस-बाउ-हक ने कहा हस्ताक्षर अभियान की बात आज मेरे सामने आई है। जिसमें आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड तक फार्म भरकर पहुंचाने है। अभी तक कन्नौज सदर में अभियान नहीं चला है। चलाने पर विचार हो रहा है।