तिर्वा (कन्नौज)। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवीश सिंह राजपूत और उनकी टीम ने संस्थान का नाम रोशन किया है। डॉ. रवीश के नेतृत्व में एक हाईटेक शोध-पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित हुआ है। इस कामयाबी से कॉलेज और पूरा क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
यह शोध पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर किया गया है। इसका विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित माइक्रोएल्गी (काई) के माध्यम से सतत अपशिष्ट जल शोधन है। इसमें संसाधनों का पुनर्चक्रण एवं हरित ऊर्जा उत्पादन भी शामिल है। टीम ने अध्ययन किया है कि कैसे एआई और माइक्रोएल्गी का इस्तेमाल करके गंदे पानी को साफ किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से उपयोगी संसाधनों को री-साइकिल करने के साथ हरित ऊर्जा का उत्पादन भी संभव होगा। इसे पर्यावरण, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और एनर्जी सेक्टर के लिए एक गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ कई प्रमुख संस्थानों ने काम किया है। इनमें मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) जयपुर शामिल है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) लखनऊ के वैज्ञानिक भी जुड़े हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के शोधकर्ताओं ने भी इसमें सहयोग दिया है।
राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक मनोज कुमार शुक्ल ने इस सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि डॉ. रवीश सिंह राजपूत की यह सफलता कॉलेज में रिसर्च और इनोवेशन के माहौल को मजबूत करेगी। बीटेक के छात्रों को अपने प्रोफेसर्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर चमकते हुए देखकर प्रेरणा मिलेगी।