कन्नौज। चार-पांच दिन से तापमान में वृद्धि से सरसों और गेहूं की फसल में रस चूसक कीटों का प्रकोप की आशंका है। रात के तापमान में आंशिक वृद्धि से गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। इसके चलते किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। उधर, कृषि अधिकारियों के अनुसार दो दिन पहले तक तापमान फ सलों के लिए अनुकूल था, लेकिन इसके बाद तापमान में एकाएक वृद्धि होने से फ सलों में रस चूसक कीटों का प्रकोप हो सकता है।
मौसम का मिजाज रोज-रोज बदल रहा है। दिन में चटक धूप रहती है, शाम होते के तापमान में गिरावट होने लगती है। तापमान के उतार चढ़ाव से गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है। इसको लेकर गेहूं उत्पादक किसान चिंतित हैं। ऐसे में किसान गेहूं की खेती करने से किनारा करने का मन बनाने लगे हैं।
इस समय न्यूनतम तापमान 12 से 13 और अधिकतर तापमान 19 से 23 डिग्री सेल्सियस चल रहा है। यह समय गेहूं के पौधों के बढ़ने का है। ऐसे में तापमान में उतार-चढ़ाव से गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने का आशंका है। गेहूं का पौधा पीला हो सकता है। कृषि अधिकारी राममिलन सिंह ने बताया कि ऐेसे में गेहूं की फ सल में तापमान को स्थिर रखने के लिए किसानों को चाहिए कि वह खेत में हल्की सिंचाई करें। सिंचाई करने से तापमान 0.5 डिग्री से 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि खेत में धुआं करके भी फसल को बचाया जा सकता है।
जिला कृषि अधिकारी राममिलन सिंह ने बताया कि सामान्य से ज्यादा तापमान होने से सरसों व गेहूं की फ सल में रसचूसक कीड़े का प्रकोप हो जाता है। यह कीड़ा सरसों के फू ल से रस चूसता है। इससे फूल नीचे गिर जाता है और फलियां नहीं लगने से उत्पादन कम होता है। यही कीड़ा गेहूं की फ सल में भी लगता है और बालियों का रस चूस लेता है। इससे पौधा कमजोर हो जाता है और उत्पादन प्रभावित होता है।