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अगरबत्ती की जानलेवा फैक्टरी पर प्रशासन का ‘हाथ’

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कन्नौज। हरदोई रोड पर चल रही अगरबत्ती की जानलेवा फैक्टरी पर प्रशासन का ‘हाथ’ बना हुआ है। यही वजह है कि यह बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र और रजिस्ट्रेशन के चल रही थी। यहां तीन बार आग लगी। पांच मजदूरों की जान चली गई। इसके बाद भी प्रशासनिक और पुलिसिया जांच ढीली है।
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हरदोई रोड पर यह अगरबत्ती कारखाना हाजीगंज निवासी राजू खां का है। यहां पहली बार 23 मई को बड़ी आग लगी। धमाके के साथ आग लगी थी। इसमें चार मजदूर झुलसे थे। एक-एक कर चारों की मौत हो गई। पुलिस व प्रशासन ने अगरबत्ती कारखाने में अपना ताला लगा दिया। इसके बाद 24 मई को दूसरे ही दिन बंद फैक्टरी में आग लग गई। दमकल विभाग काफी मशक्कत के बाद आग को बुझा पाया। इधर, सभी झुलसे लोगों का कानपुर में इलाज हो रहा था। आग लगने के दौरान पहले दिन पुलिस व प्रशासनिक टीम ने फोरेंसिक जांच के लिए नमूने इकट्ठे किए। इन्हें जांच के लिए लखनऊ भेजा गया।
परिजनों और झुलसे मजदूर की ओर से बयान में आरोप लगाया गया कि फैक्टरी में बारूद पीसा जाता है। नौ जून को चौथे मजदूर शीलू की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। जीटी रोड जाम कर प्रदर्शन किया गया। तब फैक्टरी मालिक राजू खां पर कोतवाली में रिपोर्ट लिखी गई। प्रदर्शन कर रहे लोगों को मुआवजे व कार्रवाई का आश्वासन देकर घर भेजा गया था। कुछ दिन मामला उछला रहा। इसके बाद शांत हो गया। यह माना गया कि प्रशासन ने अगरबत्ती फैक्टरी को बंद करा दिया है। 26 जुलाई को फिर आग लगी तो लोगाें को पता चला कि फैक्टरी बंद नहीं हुई। वह चल रही है। आग लगने के इस हादसे में झुलसे तीन लोगों में अवधेश दोहरे की मौत हो गई। दो मजदूरों जीतू यादव और संजू का इलाज हो रहा है। इधर, अवधेश के पिता बालकिशन की तहरीर पर पुलिस ने मालिक अब्दुल बारी उर्फ राजू, अब्दुल्ला हारौन और दाउद हारौन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने अब्दुल बारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उधर, इलाकाई सूत्रों का कहना है कि इस फैक्टरी में लगातार कोई मजदूर नहीं रहता था। शिफ्ट में मजदूरों के चेहरे अक्सर बदल जाते थे।
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सवाल: इसी अगरबत्ती फैक्टरी में क्यों लग रही आग
जिले में 12 से 15 फैक्टरी अगरबत्ती का माड़ बनाती हैं। यहां प्रतिदिन काम होता है। आग किसी और जगह नहीं लगी। यहीं बार-बार आग लग रही है। यह चर्चा का विषय है। सुरस एवं सुगंध केंद्र के वैज्ञानिक कमलेश कुमार का कहना है कि अगरबत्ती उद्योग में किसी ज्वलशील चीज का उपयोग नहीं होता है। जिगत पाउडर, चारकोल, बबूल की लकड़ी और यूकेलिप्टस की छाल के पाउडर प्रयोग होता है। इन सबको पीसकर गोंद में मिलाने के बाद यह लकड़ी के स्टिक में चिपकाई जाती है।
फैक्टरी रजिस्टर्ड नहीं : जिला उद्योग अधिकारी
जिला उद्योग अधिकारी हरीराम राजपूत का कहना है कि यह अगरबत्ती की फैक्टरी रजिस्टर्ड नहीं है। इसे अवैध रूप से चलाया जा रहा था। वैसे भी जिले में अगरबत्ती और इत्र की कई फैक्टरी और कारखाने रजिस्टर्ड नहीं हैं।
मानक के अनुरूप अगिभनशमन की व्यवस्था नहीं
सीओ सदर शिव प्रताप सिंह का कहना है कि अगरबत्ती फैक्टरी में पूर्व में लगी आग के बाद पीसे जा रहे पाउडर को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अभी रिपोर्ट नहीं आ पाई है। कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि यहां क्या बन रहा था। दूसरी ओर अगिभनशमन अधिकारी महेश प्रताप सिंह ने बताया कि अगरबत्ती फैक्टरी में मानक के अनुरूप अगिभनशमन की व्यवस्था नहीं है। न ही इनके पास एनओसी है। यह गलत तरीके से फैक्टरी चला रहे थे। इस फैक्टरी को बंद करने के लिए पत्र लिखा गया है।
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