पंचायत चुनाव की मतगणना का कार्य एक दिन पहले रविवार
को पूरा संपन्न हो गया था। प्रधान पद के प्रत्याशियों को जीत के प्रमाणपत्र
परिणाम आने के बाद ही वितरित कर दिए गए। ग्राम पंचायत सदस्य पद के
प्रत्याशियों को दूसरे दिन भी प्रमाणपत्र नसीब नहीं हो सके।
जीते हुए
प्रत्याशी पूरे दिन ब्लाक परिसर में डेरा डाले रहे, पर उन्हें प्रमाणपत्र
नहीं मिल सके। विकास खंड क्षेत्र के 1,184 पदों पर ग्राम पंचायत
सदस्यों का चुनाव होना था। यहां 785 सीटों पर निर्विरोध सदस्य चुन लिए गए
थे। 167 वार्डों में कोई भी नामांकन न होने से वहां सीटें रिक्त हैं।
पूरे
विकास खंड क्षेत्र में 232 वार्डों में ग्राम प्रधान पद के साथ चुनाव कराया
गया था। रविवार को मंडी समिति में हुई मतगणना के बाद प्रधान पद के साथ ही
ग्राम पंचायत सदस्यों के भी परिणाम घोषित कर दिए गए थे। प्रधान पद के तो
जीत के प्रमाणपत्र देर रात तक वितरित कर दिए गए, पर सदस्य पदों के
प्रमाणपत्र वितरित नहीं हो सके थे।
अगले दिन सोमवार की सुबह से ही
प्रमाणपत्र लेने की आस में सदस्य पद पर जीते प्रत्याशी ब्लाक परिसर पहुंच
गए थे। पूरे दिन इंतजार के बाद भी उन्हें प्रमाणपत्र हासिल नहीं हो सके। इस
बाबत जब बीडीओ अनिल कुमार से जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि कुछ
लोगों को तो प्रमाणपत्र दे दिए गए हैं।
सहायक निर्वाचन अधिकारियों के न आने
के कारण प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हो सके हैं। अगले दिन प्रमाणपत्र वितरित
कर दिए जाएंगे। उधर, चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला ग्राम पंचायत
खुबरियापुर में देखने को मिला। यहां मुन्नी देवी ने अपनी निकटतम
प्रतिद्वंद्वी मुन्नी देवी को हराकर प्रधान पद पर जीत हासिल की। मुन्नी ने
मुन्नी को हराया।
इस बात की काफी चर्चा रही। अबकी ग्राम पंचायत खुबरियापुर
महिला के लिए आरक्षित थी। यहां से प्रधान पद के लिए 12 प्रत्याशी किस्मत
आजमा रहे थे। जिसमें मुन्नी देवी नाम की एक-दो नहीं बल्कि तीन प्रत्याशी
मैदान में थी। यहां से राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पूर्व प्रधान
राजपाल सिंह चौहान ने अपनी पत्नी मुन्नी देवी को चुनाव मैदान में उतारा था।
उनके
खिलाफ अमर सिंह की पत्नी मुन्नी देवी, लाखन सिंह की पत्नी मुन्नी देवी भी
अन्य प्रत्याशियों के अलावा चुनावी जंग लड़ रही थी। गांव के लोगों ने
राजपाल सिंह की पत्नी पूर्व प्रधान मुन्नी देवी पर विश्वास जताते हुए
उन्हें 1167 मत प्रदान किए, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहीं अमर सिंह
की पत्नी मुन्नी देवी को 733 मत हासिल हुए, जबकि तीसरी प्रत्याशी मुन्नी
देवी पत्नी लाखन को 470 वोट मिले।
ग्राम पंचायत विशुनगढ़ से वहां के कभी
राजा रहे सदानंद की नातिन आराधना प्रधान पद के लिए चुनाव मैदान में थी, पर
वह ग्रामवासियों का विश्वास नहीं जीत सकी। मतगणना के बाद घोषित चुनाव
परिणाम में कौशल्या देवी ने 1001 मत हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी
आराधना दुबे को 31 मतों के अंतर से हरा कर जीत हासिल की।
विकास खंड
क्षेत्र में एक हजार से अधिक वोट हासिल करने वालों में ग्राम पंचायत
खुबरियापुर से प्रधान चुनी गई मुन्नी देवी चौहान को 1167 वोट मिले थे।
ग्राम पंचायत नौली से प्रतिमा ने 1742 मत हासिल किए, जबकि प्रमिला को 1414
मत हासिल हुए।
इसके साथ ही ग्राम पंचायत मिघौली से पूर्व प्रधान रामेंद्र
सिंह फौजी की पत्नी प्रेमलता यादव ने 1379 मत प्राप्त कर प्रधान पद पर जीत
हासिल की। यहां से उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी गंगा देवी को 1146 वोट मिले।
कसावा की माया देवी को 1165 वोट मिले। ग्राम पंचायत असेह से उदयभान सिंह को
1094 मत प्राप्त हुए।