कन्नौज। उप संचालक चकबंदी की अदालत में लंबित बेहद पुराने वाद का निस्तारण होने पर वादकारियों ने राहत की सांस ली है। बताया गया कि वर्ष 1967 में परगनाधिकारी की ओर से सुलहनामा के आधार पर वाद का निस्तारण किया गया। इसे बाद में एक पक्ष द्वारा चुनौती दी गई। इसके बाद वर्ष 1973 में न्यायालय तहसीलदार, 1987 में चकबंदी अधिकारी की ओर से निर्णय दिया गया। मामले में 24 दिसंबर 2003 को निगरानी वाद उप संचालक चकबंदी के न्यायालय में दायर किया गया।
तहसील तिर्वा के मौजा सिमरिया निवासी भूपति व मिजाजी ने पहली बार बंटवारा के वाद में अंश निर्धारण व स्वामित्व को लेकर वर्ष 1967 में वाद दायर किया था। इसमें बुलाकी के पुत्र हरीराम आदि ने वर्ष 2003 में निगरानी दायर की। पक्षों के बीच बटवारा के बाद में अंश निर्धारण व स्वामित्व को लेकर करीब 60 साल तक लड़ाई चली। उप संचालक चकबंदी न्यायालय में वर्ष 2003 से सुनवाई चल रही थी। करीब 23 साल तक चकबंदी न्यायालय में मुकदमा चलने के बाद 16 अप्रैल 2026 को अपर जिलाधिकारी न्यायिक, उप संचालक चकबंदी विजय कुमार मिश्रा की अदालत ने फैसला करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया।
इससे दोनों पक्षों ने खुशी जाहिर की। वहीं प्रकरण को लेकर चर्चा रही कि दादा की ओर से दायर वाद का पोता के समय में निस्तारण हो सका। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार तहसील तिर्वा के परगना सौरिख के मढ़पुरा गांव के वर्ष 1983 से लंबित बंटवारा वाद जो कि उप संचालक चकबंदी न्यायालय में वर्ष 2005 में दायर किया गया, जिसका निस्तारण 23 मार्च 2026 को किया गया। न्यायालय द्वारा अंश निर्धारण व स्वामित्व को लेकर किए गए फैसले से दोनों पक्षकार संतुष्ट हुए, इस तरह मामले का करीब 60 साल बाद पटाक्षेप हो सका।