ठठिया। ठठिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कुत्ते के काटने के बाद लगने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। इसके बजाय, मरीजों को 10 किलोमीटर दूर राजकीय मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। इस अव्यवस्था के कारण कई बार मरीजों को समय पर जीवनरक्षक वैक्सीन नहीं मिल पाती। इस कारण रैबीज जैसी घातक बीमारी के मद्देनजर बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कुत्ते के काटने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इसके बावजूद केंद्र पर नियमित रूप से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराए जाते। इस कारण मरीजों को मजबूरन लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रैबीज एक जानलेवा बीमारी है जिसके इलाज में देरी गंभीर परिणाम दे सकती है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही एंटी रैबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉ. रोहित कुमार ने इस समस्या का एक कारण बताते हुए कहा कि एंटी रैबीज वैक्सीन की एक शीशी में पांच डोज होते हैं। यहां पर एक या दो मरीज ही आते हैं। इस कारण शेष डोज खराब हो जाते हैं। इसी वजह से कम संख्या में मरीजों के आने पर वैक्सीन नहीं लगाई जाती और उन्हें अन्य केंद्रों पर भेज दिया जाता है। वहीं, प्रभारी डॉ. राजन शर्मा का दावा है कि केंद्र पर वैक्सीन की उपलब्धता है। उन्होंने इस मामले की जांच का आश्वासन दिया है कि आखिर क्यों वैक्सीन लगाए जाने के बावजूद मरीजों को अन्यत्र भेजा जा रहा है।
केस एक :
बहसुईया गांव निवासी राधेश्याम (45) को कुत्ते ने काट लिया था। एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए ठठिया पीएचसी पहुंचे, लेकिन अन्य मरीज न होने पर इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया। इसके बाद उन्हें 10 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल इंजेक्शन लगवाने जाना पड़ा।
केस दो :
ठठिया कस्बा निवासी रामस्नेही पाठक (70) ने बताया कि तीन दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था। इलाज के लिए पीएचसी पर पहुंचे, लेकिन वहां पर इलाज नहीं हो सका और 10 किलोमीटर दूर राजकीय मेडिकल कॉलेज इलाज कराने के लिए जाना पड़ा।