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उमर्दा पुल जैसा न हो ऐमा पुल का हाल

Sun, 04 Jan 2015 11:44 PM IST
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
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क्षेत्र में निचली गंगा नहर पर ऐमा गांव के पास बना पुल भी जर्जर हालत में हैं। पुल में दरारें पड़ने से भारी वाहनों ने यहां से निकलना बंद कर दिया है। ग्रामीणों ने डीएम, क्षेत्रीय विधायक और सिंचाई विभाग के अभियंताओं से पुल का सर्वे कराकर पुर्ननिर्माण कराए जाने की गुहार लगाई है।
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अंग्रेजी हुकूमत ने कानपुर ब्रांच नहर पर 1851 में पुल का निर्माण कराया था। ठठिया के पूर्व प्रधान सुभाष दोहरे, बीडीसी मो. शहनूर ने बताया कि कई दशक से पुल की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया है। इस वजह से मौजूदा समय में पुल की हालत खस्ता होती जा रही है।

इसके बावजूद जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। उमर्दा में नहर पुल टूट जाने के बावजूद प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है। जबकि इस पुल से करीब 50 हजार की आबादी जुड़ी है।
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प्रधान पति योगेंद्र कुशवाहा, व्यापारी संतराम कटियार, गगन अग्निहोत्री का कहना है कि पुल की हालत बहुत जर्जर है। इससे गुजरने वाले वाहनों की तादात भी बढ़ गई है। ऐसे में पुल कभी भी टूट सकता है। लोहे का पुल एंगल के सहारे टिका है, जो जंग खाकर कमजोर हो गए है।

कुछ समय पूर्व मरम्मत की गई थी, उसमें दरारें पड़ गई हैं। विभागीय उदासीनता के कारण इस पुल की देखरेख नहीं हो पा रही है। पुल की खस्ता हालत के चलते भारी वाहन गुजरने से कतराने लगे हैं। इन वाहनों को 10 से 20 किमी दूरी का चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। इससे लोगों का समय व किराया बढ़ रहा है। वाहन चालकों ने अपना भाड़ा बढ़ा दिया है, जिससे किसानों को खामियाजा भुगतना पड़ता है।

ग्रामीण मनोज अवस्थी, मदन अग्निहोत्री का कहना है कि लोहे के एंगल क्षतिग्रस्त होकर खतरे को दावत दे रहे हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इससे गांव वाले बेहद परेशान हैं।

तिजलापुर निवासी अंशू व जैनपुर निवासी अभिषेक मिश्रा, रतीराम वर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस मामले में दखल देना चाहिए। जिले में कई नए पुलों का निर्माण कराया जा रहा है। ऐसी स्थिति में अन्य जर्जर पुलों की मरम्म्त के लिए भी सीएम को बजट आवंटित करना चाहिए।
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इन गांवों के लोग गुजरते हैं पुल से
ॎ जैनपुर, गुरौली, सदलेपुरवा, मड़ईपुरवा, खग्गापुरवा, पलेरा, तिखवापुर, रामनगर, जनखत, ऐमा, जिंदापुरवा, नयापुरवा, मक्कापुरवा, सिंहपुर, उमरन, हिसामुद्दीनपुर, जैनपुर, तिजलापुर, ठठिया, उमगरा, अज्यौरा, सिमरिया, खैरनगर, करसाह, मदनापुर, बारापुर, झउआ, पहाड़ीपुर, भगवंतापुर, औसेर समेत लगभग आधा सैकड़ा गांव के लोग आते-जाते हैं।
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अभी तक नहीं कराई गई वैकल्पिक व्यवस्था
तिर्वा। कन्नौज-औरैया हाइवे पर उमर्दा में नहर पुल टूटने के बाद अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। सेतु निगम के अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि शासन बजट दे तो वे पुल का निर्माण कराएं। वहीं सिंचाई विभाग प्रपोजल तैयार किए जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है।

फिलहाल अभी कई महीने तक लोगों को 10 से 14 किमी का चक्कर लगाकर आना-जाना पड़ रहा है। औरैया-कन्नौज मार्ग पर चलने वाली प्राइवेट बसें भी इंदरगढ़ से होकर बेला पहुंच रही हैं। रूट की दूरी बढ़ जाने के कारण बस व मैजिक चालक यात्रियों से अधिक किराया वसूल रहे हैं। अभी तक तिर्वा से उमर्दा तक का किराया 10 रुपये लगता था। अब इसे बढ़ाकर 15 रुपया प्रति सवारी वसूला जा रहा है।

ऐमा पुल का जल्द सर्वे कराया जाएगा। यदि पुल की हालत जर्जर है तो सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से वार्ता करके पुननिर्माण कराने का प्रयास कराएंगे। जनता की परेशानी को देखते हुए इस मुद्दे पर सोमवार को उच्चाधिकारियों से वार्ता करेंगे। जल्द ही प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भिजवाएंगे। ताकि जनता पर मंडरा रहा खतरा दूर किया जा सके।
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-रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी
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