डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले इंजीनियर
दूसरे दिन भी कलक्ट्रेट पर गरजे। नारेबाजी करते हुए मांगे पूरी न होने तक
सरकार के खिलाफ आरपार के आंदोलन का बिगुल फूंका। कहा कि डीएम के माध्यम से
मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेज रहे हैं, इसके बाद भी सुनवाई न हुई तो 15 से
17 फरवरी तक लखनऊ में तीन दिनीक्रमिक अनशन किया जाएगा।
इसके बाद जरूरत
पड़ी तो बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। महासंघ के जिलाध्यक्ष राममहेश
वर्मा ने सीएम को संबोधित ज्ञापन में लिखा कि 23 मार्च 15 को डिप्लोमा
इंजीनियर्स की मांग पर 4800 ग्रेड पे प्रदान करने की मांग पर सहमति प्रदान
की गई थी। इसके बावजूद अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ।
50 फीसदी पदोन्नति
कोटा के बाद भी 20 जूनियर इंजीनियर्स की ही भौतिक रूप से प्रथम पदोन्नति 25
से 30 वर्षों के बाद हो पाती है। शेष जेई मूल पद से ही सेवानिवृत्त हो
जाते हैं। ऐसे में दूसरी व तीसरी पदोन्नति से पहले ही सेवा समाप्त हो जाती
है।
जनपद सचिव मकरंद सिंह यादव, संघर्ष समिति के चेयरमैन राम मिलन, संगठन
सचिव अशोक सिंह, लेखा संप्रेक्षक अंकुर सक्सेना ने कहा कि जेई को राजपत्रित
अधिकारी घोषित करने, तीन पदोन्नति करने, वाहन भत्ते के रूप में 30 लीटर
पेट्रोल के मूल्य के बराबर धनराशि प्रदान करने की मांग पूरी न होने तक
संघर्ष चलता रहेगा।
इंजीनियर चांदनी यादव, विनोद यादव, मुन्ना प्रसाद
पाल, अनिल सचान, दीपक कुशवाहा, सुनील आनंद ने कहा कि नई पेंशन व्यवस्था को
खत्म कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए और केंद्र की भांति भत्ते
प्रदान किए जाएं। प्रदर्शनकारी अभियंता हाकिम सिंह, कृष्ण प्रताप सिंह,
इंद्रजीत कटियार, सतेंद्र शुक्ला, अयोध्या प्रसाद, एस दयाल, वीके शुक्ला ने
कहा कि लगातार हो रही उपेक्षा के कारण मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ रहा है।
अब मांगे पूरी न होने तक संघर्ष चलता रहेगा। अभियंता ओमपाल सिंह, आकाशदीप,
प्रभात गुप्ता, राहुल यादव, जुग्गीलाल गौतम, जगदीश कनौजिया, अमर वर्मा,
महेश गोंड, सींचपाल सिंह, हेमवीर कसाना, मंजीत कुमार ने कहा कि हक व हितों
के लिए सभी एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। संचालन बृजेंद्र मोहन ने किया।
उधर,
जल निगम, पीडब्ल्यूडी, पालिका, आरईडी, राजकीय निर्माण निगम समेत कई
विभागों के डिप्लोमा इंजीनियर्स के धरना प्रदर्शन का असर जिले में संचालित
विकास कार्यों पर भी पड़ा। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी ज्यादातर निर्माण
कार्यों पर ब्रेक लगा रहा। अभियंता साइड की बजाय सीधे धरना स्थल पर
पहुंचे।