कन्नौज। क्षय रोग से पीड़ित बच्चों को अब स्वास्थ्य विभाग नई दवा देगा। यह दवा छह से 17 वर्ष तक के क्षय रोग से पीड़ित बच्चों को दी जाएगी। इस दवा से मरीज जल्द ठीक होंगे।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.जेजे राम ने बताया कि क्षय रोग में अलग-अलग स्टेज होती हैं। इनमें से एक मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट(एमडीआर) और दूसरी एक्सेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट (एक्सीडीआर) है। ऐसे मरीजों को हाई डोज की जरूरत होती है। इसके लिए बीडाकुलीन दवा लांच की गई थी। यह काफी असरदार है। अभी जिले में 20 मरीजों को यह दवा दी जा रही है। बच्चों के लिए यह दवा सटीक नहीं है। इससे सरकार एवं स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमडीआर व एक्सीडीआर पीड़ित बच्चों के लिए नई दवा डेलामानिड लांच की है। इस दवा का कोर्स छह महीने का होगा।
जिला कार्यक्रम समन्वयक रंजीत सिंह ने बताया कि इस दवा की खुराक 3200 रुपये की है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को यह मुफ्त में दे रहा है। यह दवा बाजार में उपलब्ध नहीं होगी। यह टीबी विभाग की ओर से मरीजों को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभाग आगरा ने टीबी की नई दवा को लांच की है।
क्या है टीबी
टीबी यानी ट्यूबरक्लोसिस को क्षय रोग, तपेदिक, रायक्षमा, दण्डाणु नामों से भी जाना जाता है। यह संक्रामक बीमारी है। इससे ग्रस्त लोग शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। इससेे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। टीबी फेफड़ों के साथ शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करती है।
टीबी के लक्षण
भूख न लगना, अचानक वजन कम हो जाना, बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का अहसास होना, थकावट आना, रात में पसीना आना, हल्का बुखार रहना, खांसी रहना, खांसी में बलगम और बलगम में खून आना।
ऐसे बचें टीबी रोग से
दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी रहती है तो डॉक्टर को दिखाएं। बलगम की जांच कराएं। रोगी से मिलने जा रहे हों तो मास्क पहनें। समय पर खाना खाएं। आपके आसपास कोई बहुत देर तक खांस रहा तो उससे दूर रहें। किसी बीमार व्यक्ति से मिलने के बाद अपने हाथों को जरूर धो लें। पौष्टिक आहार लें।