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अब मेडिकल कालेज में होगा प्लाज्मा थेरेपी से इलाज

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मेडिकल कालेज का प्रशासनिक भवन। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। अब मेडिकल कालेज में भी कोरोना संक्रमण के गंभीर रोगियों का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज किया जाएगा। मेडिकल कालेज प्रशासन ने एफेरेसिस मशीन (रक्त से प्लाज्मा अलग करने वाली मशीन) का आर्डर दिया है। जल्द यह मशीन आ जाएगी। मेडिकल कालेज के अधिकारियों का दावा है कि सितंबर के पहले सप्ताह से कोरोना के गंभीर मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी से उपचार शुरू कर दिया जाएगा।
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मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत सिंह ने बताया कि इस थेरेपी में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीज का प्लाज्मा कोरोना पीड़ित को चढ़ाया जाता है। अभी तक जहां भी प्लाज्मा थेरेपी पर काम हुआ, वहां मरीजों की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है। इसी को देखते हुए एफेरेसिस मशीन मंगवाई गई है। इसके आते ही आईसीएमआर से दिशा-निर्देश प्राप्त कर मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। सितंबर माह के पहले सप्ताह से कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा। मेडिकल कालेज के रक्तकोश प्रभारी डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि एफेरेसिस मशीन के लिए खाद्य एवं औषधि निदेशालय लखनऊ से लाइसेंस लेने के लिए आवेदन भी कर दिया गया है।
ये है प्लाज्मा थेरेपी
इस प्रक्रिया में किसी बीमारी से ठीक हो चुके व्यक्ति के प्लाज्मा को स्टोर कर उसी बीमारी से संक्रमित मरीज के शरीर में डाला जाता है। प्लाज्मा में मौजूद एंटीबाडी (जो किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में बनती हैं) के असर से मरीज के शरीर में मौजूद वायरस कमजोर होने लगता है। मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।
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इस तरह काम करेगी एफेरेसिस मशीन
प्लाज्मा डोनर के शरीर से एफेरेसिस मशीन में तीन बार में रक्त भेजा जाता है। यह मशीन रक्त से प्लाज्मा अलग कर रक्त को वापस डोनर के शरीर में पहुंचा देती है। डोनर के शरीर से 500 मिली प्लाज्मा निकालकर उसे माइनस 40 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर सहेजा जाता है। इसके बाद मरीज के शरीर में डाला जाता है।
अन्य बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति से नहीं लिया जाएगा प्लाज्मा
कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके लोगों से प्लाज्मा लिया जाएगा। उन्हीं लोगों का सैंपल लिया जाएगा, जिन्हें हाइपरटेंशन, मधुमेह, कैंसर, टीबी से लेकर अन्य बीमारियां नहीं हैं। मरीज की पूरी तरह से जांच करने के बाद ही चिकित्सक प्लाज्मा लेकर गंभीर संक्रमित को चढ़ाएंगे।
बगैर इलाज ठीक हुआ कोरोना, इसका भी चलेगा पता
कोरोना संक्रमितों के इलाज में मेडिकल कालेज ने एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। मेडिकल कालेज की लैब में एंटीबाडी टेस्ट शुरू किया गया है। इससे पता चल जाएगा कि मरीज को पहले कोरोना था और वह बगैर इलाज के ठीक हो गया है। इसके साथ संक्रमित की जांच करने पर यह भी पता चल जाएगा कि उसके शरीर में संक्रमण कितने प्रतिशत है।
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