कन्नौज। बाजार से गायब दो हजार के नोट अब बैंकों में इक्का दुक्का ही पहुंच रहे हैं। करंसी चेस्ट से भी शाखाओं को दो हजार के नोट नहीं मिल रहे हैं। एटीएम से भी पांच सौ और सौ के नोट मिल रहे हैं। बाजार से दो हजार के नोटों के गायब होने के पीछे जमाखोरी की वजह सामने आई है। नोटों की डंपिंग से बाजार में नगदी का संकट है। ऐसा बैंक अधिकारी भी मान रहे हैं।
जिले में विभिन्न बैंकों की 131 शाखाएं हैं। सबसे ज्यादा ग्रामीण बैंक की 44 शाखाएं हैं। इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया की 15, भारतीय स्टेट बैंक की 12, पंजाब नेशनल बैंक की 10, कोआपरेटिव बैंक की नौ, सेंट्रल बैंक की सात, बैंक ऑफ इंडिया की पांच के अलावा सिंडिकेट, विजया, केनरा, इंडियन, ओवरसीज, ओरियंटल कार्पोरेशन और यूको बैंक की शाखाएं शामिल हैं। इन सभी बैंकों के 90 एटीएम हैं।
जिले में दो हजार के नोटों के गायब होने से बैंकों में जमा होने वाली नगदी भी घटी है। पिछले साल मार्च तक जिले की इन सभी बैंकों का रोजाना का करीब सात करोड़ रुपये का कारोबार था। यानी इतनी रकम रोजाना जमा और निकाली जाती थी। अब यह घटकर करीब पांच करोड़ पर आ गई है। यानी लगभग दो करोड़ का नगद ट्रांजेक्शन घटा है। बैंक अधिकारी इसके पीछे दो हजार के नोटों के बाजार से गायब होने और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ने को बड़ी वजह मानते हैं। यानी बाजार से नगदी कम हुई है और लोग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का सहारा ले रहे हैं।
इसके अलावा कभी एटीएम से नगदी निकालने पर दो हजार के नोटों की संख्या ज्यादा होती थी। अब ऐसा नहीं है। दो हजार रुपये निकालने पर भी पांच सौ रुपये के चार नोट या फिर इससे छोटे नोट ही निकल रहे हैं।
जमाखोरी के कारण दो हजार के नोटों का संकट
लीड बैंक मैनेजर मनोज सिन्हा बताते हैं कि दो हजार की करंसी कम तादाद में चेस्ट से मिल रही है। ज्यादातर नोट इससे छोटे मिल रहे हैं। बैंकों में जो नगदी जमा हो रही, उसमें भी दो हजार के नोट लगभग गायब हैं। इन नोटों के बैंक न पहुंचने के पीछे जमाखोरी बड़ा कारण बनकर सामने आई है। यानी लोगों ने दो हजार के नोटों को डंप कर लिया है।