कन्नौज। मुसलिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य और ऐशबाग ईदगाह लखनऊ के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने मदरसे सिर्फ धार्मिक शिक्षा के लिए हैं। इनके हाईटेक होने से मुसलिमों को कोई खास लाभ नहीं मिलेगा। क्योंकि मदरसों में सिर्फ 3 फीसदी लोग ही पढ़ने जाते हैं, जबकि 97 फीसदी अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र अन्य जगहों पर पढ़ने जाते हैं। इसलिए सरकारें कालेजों की स्थापना पर जोर दें।
रविवार की देर शाम एक समारोह में शामिल होने आए खालिद रशीद ने सपा नेता नाजिम खान के आवास पर पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में मुसलिम वर्ग के लोग एक से एक अच्छे पदों पर आसीन हैं, लेकिन आईएएस में बीते तीन वर्षों में मुसलिमों के चयन का ग्राफ दो से तीन फीसदी ही रहा है। आईएएस में मुसलिमों का चयन कम होना सोची-समझी साजिश का नतीजा है। उन्होंने कहा कि मदरसे पाक-साफ हैं। आईबी की जांच में भी यह तथ्य सामने आ गए हैं। मदरसों को विदेशों से वित्तीय मदद मिलना देश की आर्थिक उन्नति के हित में हैं। वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय को मुसलिमों की तरक्की में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो आतंकवाद पनप रहा है उसके पीछे पाकिस्तान के आतंकवादियों का हाथ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सपा सरकार का कामकाज ठीक है। मुसलिम शिक्षा के क्षेत्र में सपा सरकार ने जो किया है, उसका आने वाले दिनों में पाजिटिव रिजल्ट निकलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सफाई अभियान अच्छा है। इस मौके पर सदस्य मुसलिम पर्सनल सुन्नी ला बोर्ड के सदस्य मो. इमरान, चांद कमेटी के सदस्य मो. फैज, शामीना मजार के सदर राशिद अली मिनाई, सयुस प्रदेश उपाध्यक्ष नाजिम खान, प्रधानाचार्य अहमद खान, रेहान सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।