कन्नौज। पतित पावनी गंगा मइया के प्रदूषण को कम करने के लिए जो सपना वर्ष 2005 में देखा गया था वह नौ साल बाद भी साकार नहीं हो पा रहा है। 18 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी सीवर लाइनें चालू नहीं हो सकी हैं। इसके पीछे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण न होना है। जमीन अधिग्रहण के बाद अब जल निगम और राजस्व विभाग की सुस्ती से इसका काम लटका पड़ा है। इस कारण सीवेज का गंदा पानी पाटा नाला से होता हुआ सीधे गंगा की धारा में समा रहा है।
सीवर लाइन चालू होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण में देरी हो रही है। जल निगम और राजस्व विभाग के अफसरों के बीच तालमेल की कमी होने से जमीन संबंधी कागजी औपचारिकताएं व टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने में विलंब हो रहा है। इससे गंगा का जल दिनों-दिन और प्रदूषित हो रहा है। अधिवक्ता विनोद त्रिवेदी, राजीव श्रीवास्तव, अशोक सिंह का कहना है कि जिले के उच्चाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को इस मामले में दखल देना चाहिए। करोड़ों खर्च होने के बावजूद सीवर लाइन चालू न होना अफसरों की अदूरदर्शिता का परिणाम है। गंगा सफाई से जुड़े इस मुद्दे पर देरी करना निंदनीय है।
अफसरों की तरफ से डीएम-कमिश्नर को भेजे गए प्रगति आंकड़ों को सच मानें तो शहर भर में सीवर लाइन की 1.64 किमी ट्रंक सीवर लाइन का कार्य पूरा हो चुका है। 8.02 किमी लंबी ब्रांच सीवर लाइन (गलियों में) भी डाली जा चुकी है। 2400 मीटर की मेन राइजिंग लाइन का कार्य भी 35 फीसदी पूर्ण है। इसके बावजूद सीवर लाइन एसटीपी के बगैर ठप पड़ी है। इस कारण आज भी घरों से निकल रही गंदगी गंगा में जाने से रोकने में जिला प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है।
जल निगम निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता कार्यालय की तरफ से जिलाधिकारी को हाल ही में भेजी गई प्रगति रिपोर्ट के अनुसार जलालपुर अमरा गांव के पास प्रस्तावित जमीन पर 13 एमएलडी का एसटीपी बनना है। 27.3971 एकड़ भूमि एसटीपी बनाने के लिए किसानों से ली गई है। जमीन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने का काम बेहद धीमा है, जिस कारण एसटीपी बनना अभी शुरू नहीं हुआ है। करीब दो साल तक चली कवायद के बाद भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण हो गई है पर तहसीलदार सदर के स्तर से अमल दरामद होना बाकी है।
अधिग्रहीत भूमि जल निगम को हस्तांतरित होने पर ही काम शुरू हो सकेगा। जल निगम निर्माण इकाई के अभियंताओं की मानें तो एसटीपी बनाने के लिए टेंडर मांगे गए हैं। निविदा फाइनल होते ही निर्माण शुरू कर देंगे। पांच से छह महीने में एसटीपी बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद सीवर लाइनें चालू कर दी जाएंगी।
लागत बढ़कर दो गुनी हो गई
कन्नौज। सीवर लाइन फेज वन प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत 12 करोड़ 29 लाख रुपये थी, जो देरी के कारण बढ़कर 23 करोड़ 12 लाख 35 हजार रुपया हो चुकी है। इसके सापेक्ष अब तक 18 करोड़ 49 लाख 69 हजार रुपये का बजट बजट मिला है। प्राप्त धनराशि शत-प्रतिशत खर्च कर ली गई है। मुख्य अभियंता यूपी जल निगम लखनऊ व महाप्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई कानपुर को पत्र भेजकर अवशेष बजट 4 करोड़ 82 लाख 84 हजार रुपये की मांग की गई है। अभी धनराशि प्राप्त नहीं हुई है।
वर्जन---
सीवर लाइन के प्रोजेक्ट की छानबीन कराएंगे। एसटीपी निर्माण में जो भी बाधाएं हैं, उन्हें शीघ्र दूर कराएंगे। यदि जल निगम के इंजीनियर या तहसील के अधिकारी सुस्ती बरत रहे हैं तो सख्त रुख अपनाएंगे, ताकि कार्य में तेजी आए। अक्तूबर महीने में ही एसटीपी निर्माण चालू कराने का पुरजोर प्रयास करेंगे। लापरवाह इंजीनियर बहानेबाजी छोड़कर निर्माण में तेजी लाएं वरना शासन को लिखापढ़ी कर कार्रवाई की संस्तुति करेंगे।
- रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी कन्नौज।