कन्नौज। केंद्र सरकार द्वारा संचालित आरएपीडीआरपी योजना के तहत शहरी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने का सपना लेटलतीफी की भेंट चढ़ गया है। कार्यदाई संस्था के ठेकेदारों और बिजली विभाग के अफसरों की ढिलाई का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। शासन से 24 घंटे बिजली सप्लाई मिलने के बावजूद लोकल फाल्ट के कारण आए दिन अंधाधुंध कटौती होती है। शिकायतों के बावजूद सरकारी मशीनरी की सुस्त रफ्तार से आम लोगों की परेशानी दूर होने के कोई आसार नजर नहीं आते हैं।
जिले के कन्नौज, छिबरामऊ और गुरसहायगंज शहरी क्षेत्र में रहने वाले करीब 80 हजार लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति देने के लिए 32 करोड़ 63 लाख रुपये से प्रस्तावित आरएपीडीआरपी योजना का चयन किया गया। योजना में शहर में 26 चबूतरे ट्रांसफारमर रखने के लिए बनने हैं। करीब छह महीने पहले काम शुरु किया गया था। मार्च के अंत तक योजना पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल आठ चबूतरों का ही निर्माण पूरा हो सका है। इसी तरह 225 केवीए के 26 ट्रांसफारमर रखे जाने थे। इनमें से अभी तक केवल तीन ट्रांसफारमर ही लगाए गए। दो ट्रांसफारमर 100 केवीए के लगाए गए हैं। इसके अलावा 58 किमी बंच कंडक्टर केबिल शहर में बिछाई जानी थी। इसमें से केवल 35 किमी ही बंच कंडक्टर केबिल डाली जा सकी है। बिजली के जर्जर खंभों को हटाकर 500 बिजली के नए मजबूत खंभे लगाए जाने थे। इनमें से अभी तक केवल 300 खंभे ही लगाए जा सके हैं। अन्य खंभों का अता-पता नहीं है।
इसी तरह गुरसहायगंज कस्बे में योजना की प्रगति धीमी है। गुरसहायगंज में 24 ट्रांसफारमर लगाए जाने थे, जिसमें अभी तक 20 ट्रांसफारमर लग सके हैं। चार ट्रांसफारमर लगाने का काम अभी तक अधूरा है। 20 किमी बंच कंडक्टर केबिल डाले जाने के निर्देश थे, जिसके सापेक्ष 14 किमी केबिल डाल दी गई है। जर्जर पोलों को हटाकर 400 पोल के स्थान पर अभी तक 300 पोल ही लगाए जा सके हैं। नतीजतन लोगों को ट्रिपिंग की समस्या झेलनी पड़ रही है। छिबरामऊ तहसील मुख्यालय पर 44 ट्रांसफारमर लगाए जाने थे। इनमें से अभी तक 23 ही लग सके हैं। यहां 500 बिजली के खंबे लगाए जाने थे, जिसमें अभी तक 350 ही लगाए जा सके हैं। 40 किमी बंच कंडक्टर केबिल के स्थान पर 25 किमी केबिल ही डाली जा सकी है। तीनों ही जिला-तहसील मुख्यालयों पर काम अधूरा होने से जनता को बेहतर सप्लाई नहीं मिल पा रही है। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार नाराजगी जताई और शिकायतें कीं, लेकिन काम गति नहीं पकड़ सका । अफसरों के दावों के बावजूद मार्च के अंत तक काम अधूरा रहा।