छिबरामऊ (कन्नौज)। दिल्ली पुलिस से मुठभेड़ में मारे गए आलोक गुप्ता से उसके परिजनों ने करीब तीन साल पहले ही नाता तोड़ लिया था। वह अपनी दुकान में एक औरत के साथ ब्ल्यू फिल्म बनाकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना था। उसकी मां ने तो समाचारपत्र में उसकी बेदखली का नोटिस भी प्रकाशित करा दिया था। सिपाही की हत्या के मामले में आलोक फरार चल रहा था। उसके नगर की पुरानी गल्ला मंडी स्थित आवास पर दिल्ली पुलिस ने 5 अगस्त को नोटिस चस्पा किया था। नोटिस में 28 अक्टूबर तक अदालत में हाजिर होने की तिथि निर्धारित की गई थी लेकिन इस आदेश के तीन दिन पहले ही उसे मार गिराया गया।
पुरानी गल्ला मंडी निवासी स्वर्गीय प्रेमचंद गुप्ता का पुत्र आलोक गुप्ता (26) तीन भाइयों में मझला था। बड़ा भाई अमित व छोटा भाई आशीष उर्फ रामू गल्ला मंडी में ही किराने की दुकान करते हैं। उसने मंडी में ही बालाजी मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर के नाम से दुकान भी खोल रखी थी। हाईस्कूल तक पढ़ा-लिखा आलोक शातिर दिमाग था। उसके संबंध भी गलत लोगों से थे। परिजनों ने उसे सही रास्ते पर लाने का पूरा प्रयास किया। बाज नहीं आया तो तीन साल पहले उसे घर से निकाल दिया था। उसके बाद वह अपने दोस्तों के साथ समय बिताने लगा था।
उसकी मां विनीता ने गलत आदतों से विवश होकर कानूनी रूप में भी उससे संबंध विच्छेद कर चल-अचल संपत्ति से बेदखल कर दिया था। बेदखली की सूचना 5 मार्च 2012 को अखबार में गजट कराई गई थी। आलोक ने मंडी में मोबाइल की दुकान खोल रखी थी। इसी दौरान उसके संपर्क में एक महिला आ गई जिससे उसके अंतरंग संबंध थे। उसने अपनी दुकान के अंदर ही उसके साथ ब्लू फिल्म बनाई थी जो बाद में पूरे नगर में ज्यादातर लोगों के मोबाइल में प्रसारित हो गई। उसके खुराफाती दिमाग की यह उपज उसके लिए ही घातक साबित हुई और फिर उसे दुकान बंद करनी पड़ी। वह नगर छोड़ गया। उसके बाद से उसे यहां कभी नहीं देखा गया।