कन्नौज। स्वच्छ शौचालय निर्माण के लिए आवंटित बजट को खर्च करके काम कराने के मामले में कानपुर मंडल में फिसड्डी रहे कन्नौज की एक और महकमे ने किरकिरी कराई है। जिला पंचायत राज विभाग की तरह विद्युतीकरण के मामले में भी कन्नौज जनपद सबसे पीछे है।
कार्यदाई संस्था यूपीपीसीएल की लापरवाही से 17 गांवों के लोग अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। इस पर मंडलायुक्त शालिनी प्रसाद ने नाराजगी जताई है। जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे इस ओर ध्यान दें। काम में तेजी लाने के लिए जरूरी कदम तत्काल उठाएं।
ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत कन्नौज जनपद की स्थिति पूरे मंडल में फिसड्डी पाई गई है। कमिश्नर ने प्रगति समीक्षा के बाद सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि कन्नौज में लक्ष्य 17 गांवों का विद्युतीकरण करने का था, लेकिन एक भी गांव का विद्युतीकरण नहीं कराया जा सका है। प्रगति शून्य है। उन्होंने लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए काम में तेजी लाकर जून तक शत प्रतिशत गांवों का विद्युतीकरण करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि शासन स्तर से जिले को बजट तो भरपूर मिल रहा है, लेकिन उसे खर्च करने में अधिकारियों को पसीना छूट रहा है। जनप्रतिनिधियों को भी इसकी कोई चिंता नहीं हैं। नतीजतन, जनकल्याण के लिए आया रुपया बैंकों में डंप है। आम आदमी को राहत पहुंचाने वाले विकास कार्य अधर में लटके हैं। केवल कागजी आदेश-निर्देश और दिखावे की कार्रवाई करने में माहिर अफसरों की मंडल स्तर पर हो रही समीक्षा में पोल खुलने लगी है।