कन्नौज। प्राविधिक परीक्षक कानपुर मंडल ने बुधवार को वर्ष 2011-12 में बने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल भवनों की गुणवत्ता जांची-परखी तो पता चला कि मानकों की जमकर धज्जियां उड़ी हैं। घपले देख अधिकारियों के होश उड़ गए। उनका कहना है कि शासन को जांच रिपोर्ट देकर भवन निर्माण प्रभारियों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
टीएसी के गंगमहेश शाक्य ने सबसे पहले कन्नौज विकास खंड के उच्च प्राथमिक स्कूल फतुंआपुर का निरीक्षण किया। यहां रोशनदान मानक से छोटे मिले। खिड़कियों के दरवाजे व एंगल घटिया लकड़ी के निकले। बरामदे में मसाले का घोल न डालकर ऊपर से खराब प्लास्टर पाया गया। पानी का ढलान सही न होने से जलभराव की समस्या मिली। कई अन्य खामियां भी मिलीं। नींव की दीवारें कमजोर पाई गईं। छत के ऊपर भी प्लास्टर नहीं था। फर्श पर जगह-जगह कांच की प्लेटें भी नहीं डाली गईं। छतों पर डिप कोर्स नहीं बनाया गया, जिस कारण दीवारों में नमी आती है। प्राथमिक स्कूल फतुंआपुर में अतिरिक्त कक्षा कक्ष का निर्माण भी बेहद घटिया मिला।
उमर्दा के प्राथमिक स्कूल पट्टी कड़ेरा में खिड़की-दरवाजे घटिया लकड़ी के निकले, जबकि लोहे के लगे होने चाहिए थे। छत के लिंटर में प्लास्टर ही नहीं था। दीवार पर स्कर्टिंग नहीं की गई। कमरे में बीम की साइज ही कम निकली। प्राइमरी स्कूल धीरपुर पट्टी में खिड़की के पल्ले साधारण लकड़ी के मिले। रोशनदान छोटा निकला। इसमें ग्रिल ही नहीं लगाई गई। प्राइमरी स्कूल पलटेपुरवा सबसे घटिया पाया गया। यहां पर भी छत की मुड़ेरी नहीं बनाई गई। प्लास्टर भी छोड़ दिया गया। रोशनदान का छेद नहीं बना मिला। खिड़की खराब लकड़ी की मिलीं।
केवल उच्च प्राथमिक स्कूल करौंदा शाहनगर में ही निर्माण कार्य संतोषजनक पाया गया। निरीक्षण अधिकारी ने बताया कि घटिया निर्माण की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद भवन निर्माण प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। टीएसी के अफसर ने पर्यटक आवास गृह पहुंचकर बीएसए एके यादव से वार्ता भी की।