उपकृषि निदेशक कार्यालय में गलती ठीक कराने के लिए लगी किसानों की कतार।
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कन्नौज। सरकारी सिस्टम से किसानों की लड़ाई जारी है। कन्नौज में किसान सम्मान निधि के तहत 2.56 लाख किसानों को पंजीकृत तो कर लिया गया, लाभ सिर्फ 1.80 लाख को ही मिल पा रहा है। यानी 76 हजार किसान आज भी छह हजार रुपये सालाना मिलने वाली सम्मान निधि के लिए भटक रहे हैं। कृषि विभाग में रोजाना लग रही किसानों की लाइन इसकी गवाह है। इन किसानों ने अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी है। सम्मान निधि पाने के लिए उनका संघर्ष जारी है।
मई 2019 में किसान सम्मान योजना लागू हुई थी। इसके तहत किसानों ने तेजी से रजिस्ट्रेशन कराने शुरू कर दिए। जिले में 2.56 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन करा लिए। सम्मान निधि खातों में भेजने की बारी आई तो बड़ी संख्या में किसान छूट गए। जानकारी पर इन्हें अलग-अलग कमियां बताई गईं। किसानों को सम्मान निधि न मिल पाने के पीछे कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है। इसके लिए लेखपाल बड़े जिम्मेदार हैं।
एक साल पहले आवेदन करने वाले छह हजार किसान ऐसे हैं जिनकी लेखपालों ने दो-दो माह बाद भी रिपोर्ट नहीं लगाई। अब दूरदराज के क्षेत्रों से किराया भाड़ा खर्च कर किसान विकास भवन के पास स्थित कृषि विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं। इसके अलावा फीडिंग में ऋुटि और आवेदन पत्रों में कमी के कारण भी कई किसानों की सम्मान निधि अटकी है। समय-समय पर बैठक में जिलाधिकारी रवींद्र कुमार की सख्ती के बाद काम में तेजी आ रही है। इसके बाद भी किसानों की समस्याओं का अंत होता नहीं दिख रहा है।
जल्द सभी को मिलने लगेगी सम्मान निधि: जिला कृषि अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी राममिलन सिंह परिहार ने बताया कि किसान सम्मान निधि मिलने में जो समस्याएं सामने आ रहीं, उन्हें दूर करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले महीने तक ज्यादा से ज्यादा किसानों को सम्मान निधि का लाभ मिलने लगेगा।
अभी मुआवजा लेने के लिए करें इंतजार
कन्नौज। दिसंबर के अंतिम सप्ताह और फिर जनवरी माह में हुई रिकार्ड बारिश ने आलू किसानों की कमर तोड़ दी। झुलसा रोग लगने से आलू का साइज छोटा रहने से पैदावार घटकर लगभग आधी रह गई है। हालांकि जिले के 36532 किसानों ने फसल बीमा करा रखा है। इन्हें मुआवजा मिलने में अभी वक्त लगेगा। मुआवजा वितरण की लंबी प्रक्रिया के कारण तीन-चार माह बाद ही किसानों के हाथ में कुछ आ सकेगा। मुआवजा कितना मिलेगा, यह भी अभी तय नहीं है। ऐसे में जिन किसानों ने उपज बेचकर किसी कार्यक्रम या फिर कुछ खरीदारी की उम्मीद बांध रखी थी वह पूरी होती नहीं दिख रही है। रबी फसल चक्र में अधिसूचित आलू फसल के लिए इस बार इफ्को-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने 36532 किसानों का फसल बीमा किया था। बिगड़े मौसम से आलू की फसल में लगे झुलसा रोग के कारण किसानों को आधी उपज ही मिल पा रही है। प्रति हेक्टेयर में 60 क्विंटल तक निकलने वाला आलू इस बार घटकर 25 से 30 क्विंटल ही रह गया है। किसानों की उम्मीद अब मुआवजे पर बंधी है। यह उम्मीद जल्द पूरी होती नहीं दिख रही है। बीमा कंपनी के जानकार बताते हैं कि कृषि विभाग की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद राज्य और केंद्र सरकार को अंशदान के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। अंशदान मिलने के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू होगी। इसी के बाद मुआवजा दिया जा सकेगा। मुआवजा कितना मिलेगा यह अभी तय नहीं है।