कन्नौज। अनियमितता की आड़ लेकर चिकित्सा अधिकारी संविदा कर्मचारियों का शोषण नहीं कर सकेंगे। शिकायत और लापरवाही के नाम पर आसानी से इनकी नौकरी नहीं छीनी जा सके गी। एनएचएम के निदेशक ने इसके लिए गाइड लाइन जारी की है। शिकायत मिलने पर डीएम और सीएमओ के नेतृत्व में गठित कमेटी जांच करेगी। आरोप साबित होने पर सेवा समाप्त की जाएगी।
प्रदेश में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए जिले में करीब 550 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती है। अक्सर यह कर्मचारी अधिकारियों पर शोषण और मनमानी का आरोप लगाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के निदेशक ने जिलाधिकारी रवींद्र कुमार और सीएमओ को एक पत्र जारी किया है। इसमें कहा है कि अगर संविदा पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी के कार्य में अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसे लिखित स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा। स्पष्टीकरण के बाद डीएम या सीएमओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय अधिकारियों की टीम गठित की जाएगी। टीम में अलग-अलग विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। मामले की जांच और पूछताछ के दौरान संविदा कर्मचारी पर आरोप सही साबित होने के बाद ही कार्रवाई निर्धारित की जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि संविदा कर्मचारियों द्वारा अनियमितता की शिकायत पर जारी गाइड लाइन के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इन बिंदुओं पर तय होगी कार्रवाई
15 दिन की वेतन कटौती।
एक वर्ष तक प्रमोशन न किए जाना।
ब्लाक स्तरीय कर्मचारी का अन्य ब्लाक में स्थानांतरण।
जिला स्तरीय कर्मचारी का गैर जनपद स्थानांतरण।
समिति द्वारा अन्य कोई नियमानुसार दंड।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों से नहीं हो सकेगी मनमानी
शिकायत मिलने पर डीएम के नेतृत्व में कमेटी तय करेगी कर्मचारियों पर कार्रवाई, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने डीएम, सीएमओ को जारी की गाइड लाइन