तिर्वा एसडीएम ने गुरुवार को चारागाह की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए बड़ा अभियान छेड़ा। एक ही दिन में 450 बीघे जमीन को टीम ने कब्जा मुक्त कराया। यहां बोई गईं आलू, सरसों और गेहूं की फसलों को जेसीबी चलाकर तहस-नहस कर दिया गया। इस जमीन पर करीब दो दर्जन लोग 25 साल से कब्जा जमाए हुए थे। फसल तबाह होने से कब्जेदारों को करीब 15 लाख का झटका लगा है।
इंदरगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत कलसान के मजरा लेलेपुर, भीरामऊ और भजरुइया के बीच चारागाह की सैकड़ों बीघा जमीन पर सालों से कब्जा है। सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के शासन से जारी आदेश के बाद हरकत में आए अफसरों ने गुरुवार को इन मजरों की तरफ रुख किया। एसडीएम तिर्वा अरुण कुमार के नेतृत्व में पहुंची राजस्व और पुलिस विभाग की टीम ने चारागाह की जमीन की पैमाइश की और इसके बाद यहां उगी फसलों पर जेसीबी चलवाना शुरू कर दिया। जेसीबी से फसलों को जुतवाने का क्रम सुबह से लेकर शाम तक चला। इस दौरान टीम मौके पर ही मौजूद रही। राजस्व विभाग की माने तो करीब साढ़े चार सौ बीघा जमीन के ज्यादातर हिस्से पर आलू, गेहूं और सरसों की फसल उगाई गई थी। तीन से चार बीघे जमीन पर यूकेलिप्टस के पेड़े लगे हैं। इन पेड़ों को छोड़कर फसलों को जेसीबी से जुतवा दिया गया है।
अफसरों की इस कार्रवाई से कब्जेदारों में हड़कंप मच गया। कुछ ने फसलों को छोड़ देने की दुहाई भी दी लेकिन अफसर एक नहीं माने। कानूनगो ओम प्रकाश वर्मा के मुताबिक यहां मजरा लेेलेपुर निवासी गिरीश, प्रवेश, दयाराम, सुनील, परशुराम, केशव दयाल, मजरा भजरुइया निवासी सोभरन, वीरेंद्र, जयचंद्र, ब्रजपाल, जनवीर, दलवीर, जगदीश, शिवशंकर, विद्याराम, मुन्नू, रामकली, भारत, राकेश, श्रीराम, श्याम और बाबू का करीब 25 सालों से कब्जा था। जिसे खाली करा दिया गया है। इस दौरान लेखपाल राकेश चंद्र, पुष्पकांत मिश्रा व वीरेंद्र बहादुर के अलावा इंदरगढ़ थाने के एसआई आशुतोष यादव टीम के साथ मौजूद रहे।