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42 ग्राम पंचायतों के प्रधान नहीं दे सके 20 करोड़ का हिसाब

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कन्नौज। गांवों के विकास कार्य में घोटाले हुए हैं। जिले की 504 ग्राम पंचायतों में 42 विकास के नाम पर खर्च होने वाले करीब 20 करोड़ रुपयों का हिसाब नहीं दे सकी हैं। यह राशि शासन ने राज्य वित्त व अन्य योजनाओं के माध्यम से दी थी। ऑडिट टीम ने 2009-10 से 2017-18 तक का आडिट किया है। आडिट रिपोर्ट जिला पंचायत विभाग को दे दी गई है। डीपीआरओ ने सभी 42 ग्राम प्रधानों को नोटिस भेजकर रिपोर्ट मांगी है। उधर, डीएम ने भी इस पर डीपीआरओ से रिपोर्ट तलब की है।
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आडिट टीम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को रिपोर्ट भेजकर आरोपित ग्राम प्रधानों, पंचायत सचिवों के बारे में बताया है। कहा गया है कि गांव के पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी है कि विकास कार्य में लगने वाली निर्माण सामग्री की खरीद का बिल, वाउचर लें। ऐसा नहीं हुआ। आडिट टीम ने जिले के ब्लाकों के अलग-अलग गांवों में विभिन्न वित्तीय वर्षों के विकास कार्यों का आडिट किया। इस दौरान इन ग्राम पंचायतों के पास अभिलेख न होने का खुलासा हुआ। लेखा परीक्षकों ने निष्कर्ष दिया कि विकास कार्यों के लिए आवंटित धनराशि का गबन हुआ है। वहीं डीपीआरओ जितेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि ऐसी 42 ग्राम पंचायतें सामने आई हैं। एडीओ पंचायत के माध्यम से नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।
इन ब्लाकों के गांव हैं शामिल
डीपीआरओ जितेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि आडिट टीम की रिपोर्ट में उमर्दा ब्लाक की 17, सौरिख ब्लाक की नौ, छिबरामऊ ब्लाक की एक और कन्नौज ब्लाक की 15 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
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ग्राम पंचायतों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ग्राम पंचायतों से आने वाले स्पष्टीकरण को आडिट टीम को भेजा जाएगा। अगर स्पष्टीकरण से आडिट टीम संतुष्ट नहीं हुई तो हिसाब न देने वाले प्रधानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर रिकवरी कराई जाएगी।
- जितेंद्र कुमार मिश्रा, डीपीआरओ।
पूरे मामले में डीपीआरओ से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि आखिर कमी कहां पर है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी।
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