अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। ई-फार्मेसी के विरोध में दवा व्यापारियों की हड़ताल का जिले में मिलाजुला असर रहा। शहर के मेडिकल स्टोर तो बंद रहे लेकिन कसबों और गांवों में दवा की ज्यादातर दुकानें खुली रहीं। दवा व्यापारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष यतीश स्वरूप सक्सेना ने बताया कि 28 अगस्त को केंद्र सरकार ने ई-फार्मेंसी को मंजूरी दे दी है। इससे जिले में 1000 केमिस्ट व 500 कर्मचारी प्रभावित होंगे। सरकार का ये फैसला दवा व्यापारी स्वीकार नहीं करेंगे। सक्सेना ने कहा कि सरकार 31 दिसंबर 2017 तक खुदरा ड्रग लाइसेंस के अनुपात में फार्मासिस्ट की कमीं को पूरा करें। दवा व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो। ज्ञापन देने वालों में कमल नारायण, कृष्ण मोहन तिवारी, रेहान सिद्दीकी, आमिर, अक्षय मेहरोत्रा, कुंवर सिंह यादव, नितेश कटियार, यशवर्धन त्रिपाठी, नवीन गुप्ता समेत शामिल रहे।
व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष उमर फारूक, जुनैद सिद्दीकी, विनय श्रीवास्तव, संजय बजाज, विनोद गुप्ता, जानू, अतुल, संदीप समेत आदि ने भी दवा व्यापारियों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। छिबरामऊ, सौरिख, सिकंदरपुर, तिर्वा, समधन, उमर्दा में ज्यादातर मेडिकल स्टोर खुले रहे। जनपद में करीब 300 मेडिकल स्टोर हैं। इसमें करीब 100 ही बंद रहे। मेडिकल स्टोरों की बंदी से शहर में जरूर कुछ परेशानी दिखी। सरायमीरा निवासी पियूष, चौधरी सराय निवासी दीपक शुक्ला, तिर्वा क्रासिंग निवासी रंजन दुबे और कृष्णा नगर निवासी वंशिका ने बताया कि सुबह दवा लेने के लिए जब जीटी रोड स्थित मेडिकल स्टोर पहुंची तो दुकानें बंदी मिलीं। काफी देर इधर-उधर भटकना पड़ा। शहर के अंदर भी दुकानें बंद रहीं। बाद में जानकारी पर पता चला कि जिला अस्पताल के पास एक मेडिकल स्टोर खुला है, इसके बाद वहां से दवा मंगानी पड़ी। गोल कुआं निवासी सोनू दुबे ने बताया कि उन्हें दवा लेने के लिए तिर्वा तक दौड़ लगानी पड़ी।
ई-फार्मेसी में दवाएं बाजार मूल्य से 35 फीसदी तक सस्ती हैं। इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन दवा के कारोबार को ई-फार्मेसी कहा जाता है। साइट या एप पर जाकर जब आप दवा बुक करने पर कंपनी घर पहुंचाती है। जिले में अभी ई-फार्मेसी का चलन नहीं है। दरअसल ई-फार्मेसी के कारोबारी बड़ी कंपनियों से सीधे सौदा करते हैं, इससे उन्हें ज्यादा छूट मिलती है। इसी कारण वह सस्ती दवाएं उपलब्ध करते हैं। कई ई-फॉर्मेसी जेनेरिक दवा का भी विकल्प देते हैं। पहले इंडियन इंटरनेट फार्मेसी एसोसिएशन (आईआईपीए) नाम से एक संगठन बनाया गया था, जिसका नाम बदलकर अब डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स (डीएचपी) कर दिया गया।
शहर में बंदी, कसबों में खुले रहे मेडिकल स्टोर
ई-फार्मेसी के विरोध में दवा कारोबारियों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन
फोटो 28केएनजेपी 01- तिर्वा में नहीं दिखा बंदी का असर खुले रहे मेडिकल कालेज।
फोटो 28केएनजेपी 03- शहर के सरायमीरा में बंद दिखे मेडिकल स्टोर।
फोटो 28केएनजेपी 04- कलक्ट्रेट में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देते मेडिकल स्टोर संचालक व व्यापार मंडल के लोग।