तिर्वा (कन्नौज)। राजकीय मेडिकल कालेज में चिकित्सा शिक्षकों की भारी कमी है। मेडिकल कालेज प्रशासन की सख्ती के चलते 17 चिकित्सा शिक्षक इस्तीफा दे चुके हैं। नौ चिकित्सा शिक्षक दो माह से गैर हाजिर चल रहे हैं। कई नोटिसों के बावजूद भी इन चिकित्सा शिक्षकों ने मेडिकल कालेज प्रशासन को कोई स्पष्टीकरण नहीं भेजा है।
बीस चिकित्सा शिक्षक कानपुर, मेरठ व गोरखपुर के मेडिकल कालेजों से संबद्ध हैं। 105 चिकित्सा शिक्षकों में मेडिकल कालेज के पास सिर्फ 59 चिकित्सा शिक्षक ही हैं। ऐसे में एमबीबीएस क्लास की टीचिंग प्रभावित हो रही है।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष की वार्षिक परीक्षाएं पंद्रह जुलाई से होनी हैं। ऐसे में मेडिकल कालेज प्रशासन चिकित्सा शिक्षकों की कमी को लेकर चिंतित है। इस समस्या पर मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. डीएस मारतोलिया ने शनिवार को चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक डा. केके गुप्ता को पत्र भेजकर दिशा निर्देश मांगे हैं।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने बताया कि शासन के निर्देश पर गत मई माह से सभी डाक्टरों की अटेंडेंस प्रतिदिन शासन को भेजी जा रही है। इस पर मेडिकल कालेज के कई विशेषज्ञ चिकित्सकों व चिकित्सा शिक्षकों ने रोष जताते हुए अपने इस्तीफे भेज दिए हैं। गुरुवार तक 13 विशेषज्ञ चिकित्सक अपना इस्तीफा मेडिकल कालेज को भेज चुके थे।
शुक्रवार को गाइनी विभाग की प्रवक्ता डा. अमृता शाह, प्रवक्ता डा. पल्लवी सिंह, अस्थि रोग विभाग के प्रवक्ता डा. अनिल सिंह व डा. रश्मि रस्तोगी ने भी अपने इस्तीफे भेज दिए हैं। इस तरह से 17 चिकित्सा शिक्षक इस्तीफे दे चुके हैं। नौ चिकित्सा शिक्षक एक मई से लगातार गैर हाजिर हैं। उन्होंने अपना स्पष्टीकरण भी नहीं दिया है।
प्राचार्य के मुताबिक 20 चिकित्सा शिक्षकों को कन्नौज मेडिकल कालेज से शासन ने कानपुर मेडिकल कालेज, मेरठ मेडिकल कालेज व गोरखपुर मेडिकल कालेज से संबद्ध कर दिया है। अप्रैल में मेडिकल कालेज में 105 चिकित्सा शिक्षक की तैनाती थी। अब महज 59 चिकित्सा शिक्षक ही बचे हैं।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष व द्वितीय वर्ष की वार्षिक परीक्षाएं 15 जुलाई से शुरू होनी है। प्रवक्ताओं व प्रोफेसरों की भारी कमी के चलते एमबीबीएस क्लास की टीचिंग में दिक्कतें आ रही हैं। बताया कि डीजीएमई को आज पत्र लिखा है।
15 सीनियर रेजीडेंट्स चिकित्सक भी छोड़ गए मेडिकल कालेज
तिर्वा (ब्यूरो)। मेडिकल कालेज में चिकित्सा शिक्षकों के साथ ही सीनियर रेजीडेंट चिकित्सक व जूनियर रेजीडेंट चिकित्सकों की भी कमी हो गई है। अभी तक जूनियर व सीनियर के 51 डाक्टर मेडिकल कालेज में तैनात थे। इनमें से 15 सीनियर रेजीडेंट चिकित्सक मेडिकल कालेज छोड़ गए हैं। इस वजह से गाइनी विभाग में महज एक डाक्टर, आर्थो विभाग में एक डाक्टर, एनस्थीसिया में एक डाक्टर, कैंसर व हृदय रोग में एक-एक डाक्टर, मेडिसिन में तीन डाक्टर शेष रह गए हैं। जिस वजह से मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड के लिए भी महज एक डाक्टर बचा है। इस वजह से नियमित अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। प्राचार्य के मुताबिक उन्होंने इस समस्या को लेकर शुक्रवार को जिले के दौरे पर आए चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह को पत्र देकर मेडिकल कालेज की सभी समस्याओं से अवगत करा दिया है।
- 17 दे चुके इस्तीफा, दो माह से नौ गैरहाजिर
- 105 चिकित्सा शिक्षकों में रह गए 59
- बीस चिकित्सा शिक्षक कानपुर, गोरखपुर और मेरठ से संबद्ध