चौकी इंचार्ज के साथ रामदास और उसका पिता ननदोन सिंह।
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हसेरन। यह किसी फिल्म का क्लाइमेक्स नहीं है, बल्कि हकीकत है कि 16 साल बाद जब बाप ने बेटे का दीदार किया, तो आंखों में आंसू के सिवा मुंह से कोई बात नहीं निकल रही थी। बेटा भी बाप को देखकर अवाक रह गया। बाप-बेटे का मिलाप देख पुलिसकर्मियों की भी आंखें भर आईं। दारोगा ने सहृदयता दिखाते हुए 16 साल से बिछड़े बेटे को परिवार से मिला दिया, जिससे महकमे सहित क्षेत्र के लोग भी उनकी तारीफ कर रहे थे।
बिहार के जनपद सीतामढ़ी के ग्राम भंटावारी पोस्ट पुपरी निवासी रामदास 16 साल पहले अपने भाई प्रेमदास के साथ राजस्थान के जयपुर में नौकरी करने के लिए जा रहा था। रात के समय किसी स्टेशन पर ट्रेन रुकी और रामदास नीचे उतर गया। इसके बाद दोनों भाई बिछड़ गए और रामदास अपने घर नहीं पहुंच पाया। वह बनारस के एक ढाबे पर बर्तन धोने का काम करने लगा। वहां उससे बंधुआ मजदूर की तरह काम कराया जाता था। चाहकर भी वह वहां से नहीं निकल पा रहा था। पांच दिन पहले सौरिख थाना क्षेत्र के ग्राम नेकपुर निवासी आजाद सिंह यादव पुत्र विश्राम सिंह यादव किसी काम से बनारस गए। वहीं ढाबे पर रामदास ने जब उन्हें आपबीती बताई, तो वह उसे अपने घर ले आए।
यहां आकर आजाद ने नादेमऊ चौकी इंचार्ज शीलवंत से मदद मांगी, तो उन्होंने रामदास के बताए पते पर बिहार पुलिस की मदद से संपर्क किया। दो दिन बाद रामदास के पिता ननदोन सिंह से चौकी इंचार्ज की बात हो गई। इसके बाद उसका पिता नादेमऊ पुलिस चौकी पर आया, जहां उसने 16 साल बाद अपने बेटे को देखा, तो आंखों में आंसू भर आए और कलेजे से लगा लिया। ननदोन सिंह ने बताया कि उसके परिवार में सभी लोग रामदास की बहुत याद करते थे। एक लंबा अरसा बीत गया था। इसलिए परिवार के कई लोग उसके जीवित न होने पर भी संदेह जता रहे थे, लेकिन उसे ईश्वर पर भरोसा था कि एक न एक दिन उसका खोया बेटा जरुर वापस मिलेगा। चौकी इंचार्ज शीलवंत का कहना था कि व्यक्ति चाहे नौकरी करे या व्यवसाय कभी भी मानवीय मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।
चौकी इंचार्ज को किया जाएगा सम्मानित
पुलिस अधीक्षक हरीश चंदर ने बताया कि नादेमऊ चौकी इंचार्ज शीलवंत ने बेहतर पुलिसिंग के साथ मानवीय मूल्यों का एक सशक्त उदाहरण पेश किया है। पुलिस विभाग को ऐसे कर्मचारियों पर गर्व है। शीघ्र ही एक समारोह में चौकी इंचार्ज को सम्मानित किया जाएगा।