कन्नौज। जिले में निजी अस्पतालों व क्लीनिक के पंजीयन को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अधिकांश जगह क्लीनिक के नाम पर नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं।
जिले में 317 क्लीनिक और 22 पैथोलॉजी सेंटर संचालित हैं। कई जगह झोलाछाप क्लीनिक चला रहे हैं। कई जगह क्लीनिक का बोर्ड लगाकर हास्पिटल चल रहे हैं। अधिकांश क्लीनिक के अंदर पांच से दस बेड हैं। यहां मरीजों को भर्ती किया जाता है। प्रसव से लेकर बड़े आपरेशन तक किए जाते हैं। नर्सें व कंपाउंडर उपचार, दवा लिखने के साथ ही प्रसव भी करवाते हैं। जानकारों के मुताबिक क्लीनिक में गर्भपात जैसे गैर कानूनी काम भी किए जाते हैं। एक्ट के तहत इनका रजिस्ट्रेशन न होने से विभाग के पास इनकी पुख्ता जानकारी नहीं है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि जल्द अभियान चलाकर ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
वसूलते हैं मनमाना शुल्क
मरीजों से मनमानी फीस वसूली सहित अन्य शिकायतों के बाद प्रदेश सरकार की ओर से क्लीनिकल एस्टेबलिसमेंट एक्ट बनाकर इसके प्रावधान लागू किए गए। इसके तहत सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी चिकित्सालयों और क्लीनिक के ऑनलाइन पंजीकरण के साथ मरीजों से निर्धारित फीस ली जाए। अधिकतर निजी चिकित्सालय संचालकों ने पंजीकरण को लेकर रुचि नहीं दिखाई।
नर्सिंग होम में चला रहे पैथोलॉजी
बिना पंजीयन के चल रहे निजी अस्पतालों में पैथोलॉजी का काम भी होता है। इन प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता और कार्मिकों के प्रशिक्षण की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। डायग्नोसिस सेंटर व लैब संचालक मरीजों से मनमुताबिक जांच शुल्क वसूलते हैं। कई बार चिकित्सक के मनपसंद डायग्नोसिस सेंटर व लैब में जांच नहीं कराने पर रिपोर्ट को नकार दिया जाता है।
सरकारी डॉक्टरों की खूब चलती क्लीनिक
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का मखौल उड़ाने में सरकारी चिकित्सक भी पीछे नहीं हैं। सीएमओ कार्यालय के पास एक सरकारी चिकित्सक करीब चार साल से क्लीनिक चला रहे हैं। इनकी तैनाती मौजूदा समय उन्नाव के जिला अस्पताल में है। इससे पहले वह विनोद दीक्षित चिकित्सालय के प्रभारी थे। तभी से उनकी क्लीनिक खूब चल रही है। कई बार जांच भी हुई। शासन-प्रशासन में अच्छी पकड़ के चलते हर बार जांच ठंडे बस्ते में चली जाती है।
पाली क्लीनिक के नाम पर चल रहा था नर्सिंग होम
तिर्वा कस्बे में करीब एक साल से ममता पाली क्लीनिक के नाम से अवैध अस्पताल चल रहा था। 8 मार्च 2019 को एक महिला की मौत के बाद हुए हंगामे के बाद इसकी पोल खुली। तब अफसरों ने बड़ी कार्रवाई की थी। संचालिका ममता को जेल भेजा गया था। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अन्य क्लीनिक व नर्सिंग होम के खिलाफ अभियान नहीं चलाया।
क्लीनिक के नाम पर चल रहे नर्सिंग होम
क्लीनिक में बेड डालकर प्रसव से लेकर आपरेशन का चलता खेल, चिकित्सा अधिकारियों के संरक्षण में जगह-जगह खुले हैं क्लीनिक