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वजीफे से महरूम होंगे 13 हजार विद्यार्थी

Fri, 20 Mar 2015 11:51 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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पूर्व दशम व दशमोत्तर कक्षाओं में आय व जाति प्रमाण पत्र, बैंक खातों में आन लाइन की गई आंकड़ों की बाजीगरी हजारों छात्रों को भारी पड़ गई है। इसके चलते उन्हें वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति धनराशि से महरूम होना पड़ेगा। पूर्व दशम व दशमोत्तर के 13 हजार छात्रों को अपात्र ठहराया गया है। इन छात्रों को इस बार लाभ मिलने की कोई गुंजाइश नहीं है।
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पूर्व दशम कक्षा 9, 10 की कक्षाओं में पिछड़ा, अल्पसंख्यक, सामान्य जाति के 20 हजार 395 छात्रों ने आवेदन किया था। इसमें 16 हजार छात्रों का डाटा पीएफएमएस को अग्रसारित किया गया था। इस डाटा में 13 हजार 202 छात्र पात्र पाए गए हैं। जिसमें 4170 छात्रों का डाटा लाक कर उनके खातों में धनराशि का हस्तानांतरण हो चुका है। हलांकि अनुसूचित जाति के 3737 छात्रों का डाटा अभी तक जांच की प्रक्रिया में लंबित है।

पिछड़ा वर्ग अधिकारी ने बताया कि अनुसूचित जाकि के छात्रों को 2250 व अन्य जातियों के छात्रों को 720 रुपए वजीफा धनराशि मिलेगी। दशमोत्तर कक्षाओं में अध्यनरत 58895 छात्रों ने आवेदन फार्म भरे। इसमें पिछड़ा वर्ग के 33999 आवेदनों को जांच के लिए अग्रसारित किया गया। इसमें 20,543 स्वीकृत किए गए। जबकि 13 हजार के लगभग अपात्र घोषित किए गए हैं। पिछड़ा वर्ग अधिकारी ने कहा कि सबसे पहले सरकारी विद्यालयों को धनराशि भेजी जा रही है।
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इसमें इंटरमीडिएट में अध्यनरत छात्रों को वजीफा धनराशि 2750 व शुल्क प्रतिपूर्ति 530, बीए में 3600 वजीफा, तीन हजार शुल्क प्रतिपूर्ति, एमए में वजीफा 5600, शुल्क प्रतिपूर्ति पांच हजार, बीएड में 51 हजार 250 शुल्क प्रतिपूर्ति, वजीफा 5600, एमएड में 25 हजार शुल्क प्रतिपूर्ति, वजीफा 6300, एमएसी में शुल्क प्रतिपूर्ति 6 हजार, वजीफा 5600 रुपया दिया जाएगा। पिछड़ा वर्ग अधिकारी ने कहा कि कुछ मामले ऐसे सामने आए हैं, जिसमें छात्र ने पिछली कक्षाओं में वजीफा धनराशि मांग नहीं की। इस बार मांग करने पर उनको भी रिजेक्ट की  सूची में डाला गया है। ऐसे छात्रों की जांच कराई जा रही है।

पीएफएमएस प्रणाली ने निरस्त किया डाटा
1-विगत वर्षो में समकक्ष पाठ्यक्रम में प्रवेश कर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया। वह पाठ्यक्रम अधूरा छोड़कर दोबारा दूसरे महाविद्यालय में प्रवेश लेकर वर्तमान सत्र के लिए छात्रवृत्ति आवेदन कर दिया।
2-ऐसे छात्र-छात्राएं जिनका नाम/पिता का नाम पीएफएमएस प्रणाली पर अंकित नाम/पिता का नाम से भिन्न दर्शाया गया।
3-आनलाइन भरे गए आय/जाति प्रमाण पत्र का विवरण राजस्व बोर्ड की वेबसाइट पर प्रदर्शित विवरण से भिन्न रहा।
4-ऐसे छात्र जिनके द्वारा अपने वर्ग को छोड़कर दूसरे वर्ग में आवेदन कर दिया।
5-ऐसे छात्र जिनका हाईस्कूल बोर्ड का रोल नंबर ही मिलान नहीं हुआ।
6-ऐसे छात्र जिनका हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने वर्ष एवं वर्तमान स्नातकस्तरीय पाठयक्रम में न्यूनतम दो वर्ष का अंतर न हो।
7-आवेदन करने वालों में कुछ ऐसे भी छात्र रहे हैं, जिन्होंने एक ही आय/जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है, लेकिन उनके अभिभावक समान नहीं है, यानि एक ही परिवार के नहीं है।
8-छात्रों ने एक ही पाठयक्रम में विगत वर्ष के आवेदन पत्र में दर्शायी गई आय के सापेक्ष वर्तमान सत्र में आय परिवर्तित कर नवीन आय प्रमाण पत्र लगा दिया।
9-ऐसे छात्र जिन्होंने किसी पाठ्यक्रम के द्वितीय/तृतीय/चतुर्थ वर्ष में सीधे छात्रवृत्ति के लिए आनलाइन आवेदन किया है। लेकिन प्रथम वर्ष में किसी कारणवश आवेदन नहीं कर पाए थे एवं उसी संस्थान में अध्यनरत रहे।

इनको मिलेगी राहत
पिछड़ा वर्ग अधिकारी ने बताया कि सीधे छात्रवृत्ति मांग करने वाले छात्रों को अपात्र सूची में डाला गया है। निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे छात्रों की जांच करा ली जाए यदि वह वास्तव में प्रथम वर्ष में किसी कारणवश आवेदन नहीं कर पाए थे, एवं उसी संस्थान मे अध्यनरत रहे। ऐसे छात्रों को पात्र मानते हुए डाटा अग्रसारित कर दिया जाए।

कहा कि जिनका डाटा डुप्लीकेट बैंक खाता होने के कारण संदेहास्पद हो गया है। उनमें से बैंक से प्रमाणित सही खाता धारक छात्र को अग्रसारित कर दिया जाए। जिनके हाईस्कूल अनुक्रमांक डुप्लीकेट होने के कारण संदेहास्पद हो गया है। उनमें से प्रमाण पत्र से मिलान होने पर छात्र का डाटा अग्रसारित कर दिया जाए।
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