जिला अस्पताल में एंबुलेंस का इंतजार करती गंभीर बीमार महिला व परिजन।
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हेड आफिस लखनऊ से इजाजत न मिलने पर गुरुवार को जिला अस्पताल से कानपुर हैलट रेफर की गई महिला को 108 की सुविधा नहीं मिली। ऐसे में उसे पैसे खर्च कर प्राइवेट एंबुलेंस से जाना पड़ा। शासन का निर्देश हैं कि कन्नौज के किसी अस्पताल से यदि डाक्टर गंभीर रूप से बीमार मरीज को किसी बडे़ अस्पताल में रेफर करता है तो उसे 108 की सुविधा दी जाएगी। यहीं नहीं यदि जिला अस्पताल से कोई मरीज कानपुर रेफर किया जाता है तो उसे भी 108 एंबुलेंस पहुंचाएगी।
गुरुवार को आदेशों का पालन फोन लगाने पर लखनऊ हेड ऑफिस से नहीं किया गया। इससे लाड़पुर कोतवाली गुरसहायगंज राम जानकी पत्नी किशन सैनी घंटों जिला अस्पताल के बाहर एंबुलेंस की प्रतीक्षा में पड़ी रही। इसके बाद में उसे जिला अस्पताल की सांसद निधि की एंबुलेंस को 1280 रुपये चुकाकर कानपुर अस्पताल पहुंचाया गया। किशन सैनी ने बताया कि उन्होंने 108 नंबर डायल किया तो संबंधित व्यक्ति ने पूरा विवरण पूछने के बाद कहा कि पहले मरीज को जिला अस्पताल से मेडिकल कालेज लेकर जाओ।
जिला अस्पताल से सीधे मरीज को 108 एंबुलेंस से कानपुर नहीं ले जाया जाता। इस कारण उनका मरीज करीब एक घंटे तक जिला अस्पताल के बाहर बेहोशी की हालत में पड़ा रहा। इधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. पीएन बाजपेई ने बताया कि 108 एंबुलेंस को मरीज कानपुर हैलट तक ले जाने की इजाजत है। 108 एंबुलेंस के अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाएगी। यदि मरीज गंभीर है तो डाक्टर पर निर्भर करता है कि वह मरीज को मेडिकल कालेज रेफर या हैलट कानपुर।
इस मामले में लखनऊ के 108 एंबुलेंस आफिस इंचार्ज अजय यादव ने बताया कि अस्पताल से यदि कोई मरीज रेफर किया जाता है तो संबंधित अस्पताल से बड़े अस्पताल में पहले मरीज को ले जाने की इजाजत है। छोटे अस्पताल से सीधे मरीज को कानपुर नहीं ले जाया जा सकता। काल सेंटर पर मौजूद डाक्टर से रेफर करने वाले डाक्टर की बात कराई जाती है। लेकिन मरीज के तीमारदार ने रेफर करने वाले डाक्टर से बात नहीं कराई। इसीलिए एंबुलेंस नहीं मिल सकी।