ठेकेदार और आईपीएच अधिकारियों के अलावा इस मामले में संलिप्त अन्य लोगों पर भी केस चलाया जा सकता है।
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समाज कल्याण निगम को दी जाने वाली 1.50 करोड की धनराशि माध्यमिक शिक्षा विभाग के लेखाकार की लापरवाही से राजकीय निर्माण निगम के खाते में पहुंच गई है। विभाग ने पहले मामले को दबाने का प्रयास किया, लेकिन मामला उजागर होने के बाद डीआईओएस ने इसे बढ़ी गलती मानते हुए संबंधित लेखाकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अब धनराशि को वापस करने के लिए लिखापढ़ी शुरू कर दी गई।
दरअसल, समधन कस्बे में राजकीय इंटर कालेज का निर्माण समाज कल्याण निर्माण निगम करा रहा है। इंटर कालेज की कुल लागत 2.80 लाख रुपये है। कार्रदाई संस्था को डीआईओएस विभाग ने पिछले एक वर्ष में अभी तक महज 90 लाख की धनराशि हस्तांतरित की है। मौजूदा समय में स्कूल का ढांचा बनकर खड़ा हो गया।
करीब 60 फीसदी भाग में स्लैब पड़कर प्लास्टर का काम शुरू है। काम करा रही संस्था जेपी बिल्डर्स का कहना है कि समाज कल्याण निर्माण निगम धनराशि को लेकर बराबर डिमांड भेज रहा है, लेकिन समय पर धनराशि न मिलने के कारण काम पिछड़ा हुआ है। जब धनराशि हस्तांतरित की गई तो विभागीय लापरवाही के चलते उनकी कार्रदाई संस्था को न देकर राजकीय निर्माण निगम को दे दी गई। दूसरी संस्था से धनराशि वापस आने में करीब दस दिनों से अधिक का समय गुजर जाएगा।
इधर, माध्यमिक शिक्षा विभाग के लेखाकार सर्वेश दुबे का कहना है कि चूक के चलते धनराशि हस्तांतरित हो गई है। धनराशि को वापस लेने के लिए लिखा-पढ़ी शुरू कर दी गई। डीआईओएस केपी सिंह यादव ने कहा कि यह एक बड़ी लापरवाही है। लेखाकार सहित जो भी इस प्रकरण में जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। लेखाकार को स्पष्टीकरण भेजा गया है। जवाब मिलने के बाद प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की जाएगी।