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Jhansi News: बैंकों की चौखट पर अटका युवाओं का स्वरोजगार

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झांसी। अपना काम शुरू कर स्वरोजगार खड़ा करने की उम्मीद में सरकारी योजनाओं का सहारा लेने वाले युवाओं के सामने बैंक की प्रक्रिया बड़ी अड़चन बनकर सामने आई है। इस साल एक अप्रैल से 23 सितंबर तक जिले में पांच योजनाओं के 3471 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इनमें महज 1076 प्रस्ताव ही स्वीकृत हो सके। यानी करीब 31 फीसदी आवेदनों को ही मंजूरी मिली, जबकि 69 फीसदी आवेदन खारिज कर दिए गए।
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बैंकों के स्तर से करीब 24.86 करोड़ रुपये का ऋण प्रस्तावित था, लेकिन अब तक सिर्फ 8.10 करोड़ रुपये का ऋण ही वितरित हो सका है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत सबसे ज्यादा 3085 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इनमें 954 प्रस्ताव स्वीकृत हुए और 875 मामलों में 367.91 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। इस योजना में 1313 आवेदन खारिज किए गए।
भारतीय स्टेट बैंक में इस योजना के 1215 आवेदन पहुंचे। इनमें 382 प्रस्ताव स्वीकृत हुए, जबकि 485 आवेदन खारिज कर दिए गए। बैंक ने 335 मामलों में ऋण वितरित किया। पंजाब नेशनल बैंक में 608 आवेदन पहुंचे, जिनमें 172 प्रस्ताव स्वीकृत हुए और 288 आवेदन खारिज किए गए।
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ओडीओपी में 47 फीसदी आवेदन खारिज
सरकार की ओर से बड़े स्तर पर प्रचारित एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में भी बैंक की मंजूरी युवाओं के लिए चुनौती बनी हुई है। योजना के तहत 134 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इनमें सिर्फ 27 प्रोजेक्ट को ऋण के लिए मंजूरी मिली, जबकि 63 आवेदन खारिज कर दिए गए। महज 19 प्रोजेक्ट के लिए 37.72 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। इस योजना में करीब 47 फीसदी आवेदन खारिज हुए।
मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना का भी यही हाल है। इसके तहत 57 आवेदन आए, लेकिन 20 प्रोजेक्ट ही स्वीकृत हो सके। यानी आधे से अधिक आवेदन स्वीकृति की प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ सके।

कागज पर लक्ष्य से आगे, बैंक की मंजूरी में पीछे
इन योजनाओं में कई जगह निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन आए हैं। इससे पता चलता है कि युवाओं में सरकारी स्वरोजगार योजनाओं को लेकर रुचि है और वे अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत जिले में 2500 आवेदन का लक्ष्य निर्धारित था, जबकि 3085 आवेदन पहुंच गए। ओडीओपी में 23 के लक्ष्य के मुकाबले 134 आवेदन आए। इसी तरह एक अन्य स्वरोजगार योजना में 150 के लक्ष्य के मुकाबले 186 आवेदन पहुंचे। आवेदन लक्ष्य से आगे निकलने के बावजूद बैंक स्तर पर बड़ी संख्या में प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सके।

खराब साख की वजह से नहीं मिल रहा ऋण
बैंकों से बड़ी संख्या में स्वरोजगार संबंधी ऋण आवेदन खारिज होने के पीछे बैंक अधिकारी आवेदकों की खराब साख को प्रमुख वजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि कई आवेदकों ने पहले स्वनिधि योजना समेत अन्य योजनाओं के तहत लिए गए ऋण का भुगतान नहीं किया। ऐसे में उनके खाते डिफॉल्टर हो गए हैं और बैंक नए ऋण को मंजूरी नहीं दे पाते।

बैंक ऋण देने से पहले आवेदक के दस्तावेजों और साख की जांच करते हैं। सिबिल रिपोर्ट में गड़बड़ी या दस्तावेजों में कमी मिलने पर ऋण स्वीकृत नहीं किया जाता। - योगेश ठाकुर, एलडीएम
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