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जो दर्द मिले थे तुमसे इश्क के बाजार में...

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aprajita 100 miliun smiles - फोटो : amarujala
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अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत नवोदित कवियों का सम्मेलन ‘ओपन माइक शो’ का आयोजन किया गया, जिसमें युवा कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस दौरान सभी ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ ली।
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राजकीय संग्रहालय में संस्था ‘च से चकल्लस और अनकहे अल्फाज’ के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में संस्था के डायरेक्टर इशित मिश्रा ने अपनी काव्य रचना ‘वो जो दर्द मिले थे तुमसे इश्क के बाजार में, कविता बनाकर मैंने बेच दिए हजार में...’ सुनाकर जमकर वाहवाही लूटी। इस दौरान उन्होंने कहा कि बताया कि संस्था की ओर से नवोदित कवियों को अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने के लिए मंच दिया गया है। इस कार्यक्रम में कई ऐसे कवि हैं, जिन्होंने पहली बार माइक थामा है। इस के बाद आस्था कौशिक ने रचना ‘मैं आजाद हूं, हां मैं आजाद हूं, सहमी सी हूं, पर ख्वाबों से आबाद हूं...’ प्रस्तुत की। आशुतोष विश्वकर्मा ने ‘मां के हाथ के खाने सी लजीज हो तुम...’ सुनाई। श्वेता तिवारी ने ‘सबको देखती हूं में अलग मिजाज से, इत्तेफाक ही है कि सब में एक ही शख्स मिला है मुझे...’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा अन्य नवोदित कवियों ने भी काव्य पाठ किया।
इस दौरान आशुतोष विश्वकर्मा, श्रद्धा शर्मा, भावना, कनिष्का, जान्हवी गुप्ता, अनुज बुंदेला, अहाना खरे, शोएब हुसैन, देवरथ सिंह, श्वेता चौबे, स्मृति गुप्ता, निधि, शुभम सिंह, सिद्धार्थ आदि मौजूद रहे।
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लिखने का शौक है, लेकिन सुनाने का मौका पहली बार मिला। बहुत खुश हूं। संस्था की ओर से हम जैसे नवोदित कवियों को ये अच्छा मंच दिया गया है।
- श्वेता


इस कार्यक्रम में सभी एक समान हैं। वक्ता श्रोता बन जाते हैं और श्रोताओं में से ही वक्ता आ जाते हैं। बगैर किसी लाग लपेट के नवोदित कवियों के उत्साहवर्धन का काम किया गया है।
- मकबूल आलम


नये कवियों को आसानी से मंच नहीं मिल पात हैं। इससे उन्हें ये पता नहीं चल पाता है कि जो वो लिख रहे हैं, वो लोगों को पसंद भी आ रहा है या नहीं। ये मंच इस मामले में अच्छा प्रयास है।
- आस्था कौशिक


इस मंच पर नवोदित कवियों ने बेझिझक अपनी रचनाओं की प्रस्तुति की। इससे उनका उत्साहवर्धन हुआ है। आगे लोगों के सामने अपनी रचना प्रस्तुत करने में घबराहट नहीं होगी।
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- आशीष गुप्ता
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