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Jhansi News: नई टाउनशिप में भूमि बेचकर भी बन सकेंगे 25 फीसदी जमीन के मालिक

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। ग्वालियर-कानपुर हाईवे से सटे इलाकों में आवास विकास परिषद की ओर से 1044 एकड़ में नई टाउनशिप विकसित की जा रही है। इसके लिए जमीन खरीदने पर सैकड़ों भू-स्वामियों को लैंड पूलिंग का भी विकल्प दिया जा रहा है। इसके तहत भू-स्वामी जितनी जमीन बेचेगा, उसकी तुलना में 25 फीसदी भूमि विकसित टाउनशिप में दी जाएगी। इस विकल्प को चुनने वालों को मुआवजा नहीं मिलेगा।



आवास विकास की ओर से तालपुरा, नंदनपुरा और सखी के हनुमान मंदिर के पास कॉलोनियां विकसित की जा चुकी हैं। अब लोगों के अशियाना का सपना पूरा करने के लिए आवास विकास टांकोरी, मुस्तरा और कोछाभांवर के आसपास योजना संख्या चार विकसित करने जा रहा है। इसके लिए लोगों से आपत्तियां मांगी गई हैं। अब तक करीब पांच सौ लोगों ने आपत्तियां दर्ज करवा दी हैं। इसमें ज्यादातर वो लोग हैं, जिन्होंने छोटे-छोटे भूखंड खरीदे हैं या फिर जमीन का एग्रीमेंट करवा रखा है। आवास विकास परिषद की ओर से इन आपत्तियाें का निस्तारण भी कराया जा रहा है। साथ ही, भू-स्वामियों को जमीन बेचने पर मुआवजा लेने के साथ-साथ लैंड पूलिंग का भी विकल्प उपलब्ध कराया जा रहा है। आवास विकास के अधिशासी अभियंता इंजी. डीबी यादव ने बताया कि शहरी क्षेत्र में जमीन खरीदने पर विक्रेता को दोगुना और ग्रामीण इलाकों में भूमि क्रय करने पर चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। जो लोग मुआवजा लेने के लिए इच्छुक नहीं हैं, उनके पास लैंड पूलिंग का लाभ लेने का भी विकल्प रहेगा। लैंड पूलिंग के जरिये बेची जाने वाली जमीन के सापेक्ष भू-स्वामी को 25 फीसदी भूमि टाउनशिप में दी जाएगी। वह अपनी सुविधानुसार इन दोनों में से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।
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फ्लैट, आवास से लेकर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तक होगा



नई टाउनशिप में आवास विकास परिषद भूखंड, आवास से लेकर फ्लैट तक विकसित करेगा। यहां पर पार्क से लेकर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तक होगा। आवास विकास जो टाउनशिप विकसित करता है, उसकी कई खासियत भी होती हैं। सड़क, बिजली, पानी जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं होती हैं। भूमि को लेकर भी किसी तरह का विवाद नहीं होता है।
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जानिये क्या है लैंड पूलिंग



लैंड पूलिंग को भूमि पूलिंग भी कहा जाता है। यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें जमीन के मालिक अपनी भूमि को एक साथ जोड़ते हैं। ताकि, सरकार या विकासकर्ता उसे विकसित कर सकें। विकसित होने के बाद जमीन का तय हिस्सा मूल मालिकों को वापस दे दिया जाता है। शेष भूमि का उपयोग सार्वजनिक परियोजनाओं या राजस्व बढ़ाने के लिए किया जाता है।
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