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Jhansi News: सालों गुजर गए, परिजनों तक नहीं पहुंच सकीं गुमशुदा युवतियां

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। घर की बेटियों के लापता होने के गम के साथ पिछले कई साल से डेढ़ सौ से अधिक परिवार के लोग अपनी जिंदगी जी रहे हैं। यह गम उनकी हर खुशी पर भारी है। बेटियों की तलाश के लिए पहले उन्होंने थानों के चक्कर काटे। पुलिस अफसरों तक को अपना दुखड़ा सुनाया लेकिन अधिकांश मामलों में पुलिस ने पल्ला झाड़कर उनकी फाइल बंद कर दी।



पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल 30-35 युवतियों के केस अनसुलझे रह जाते हैं। हर साल का यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच साल के दौरान लापता 117 युवतियों की तलाश अब तक पूरी नहीं हो सकी है। पिछले पांच साल के दौरान थानों में छह सौ से अधिक गुमशुदगी दर्ज की गई। इनमें सबसे अधिक गुमशुदगी बुजुर्ग, बच्चों एवं युवतियों की दर्ज हुई।
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पुलिस शुरुआत में इनकी तलाश के लिए प्रयास करती है। इनकी सूचना गुमशुदा पोर्टल पर अपलोड किया जाता है लेकिन काफी दिनों तक जब कोई सुराग नहीं मिलता, तब प्रेम संबंध से जोड़कर पुलिस इसे बंद कर देती है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि अधिकांश मामलों में पुलिस ऐसा ही करती है। नतीजा यह है कि लोग आज भी अपनों की तलाश में थाने और चौकियों से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। वहीं, एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस की टीमें निरंतर प्रयास करती हैं। विभिन्न राज्यों में वह जाकर जानकारी जुटाती है। पुलिस टीम ने कई युवतियों को बरामद कर परिजनों को सौंपा है। अन्य के लिए भी पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।



केस 1

प्रेमनगर निवासी रजनी साहू (21) 9 अप्रैल 2021 को बाजार जाने की बात कहकर निकली थी। उसके पास मोबाइल फोन भी नहीं था। काफी देर तक वापस न लौटने पर परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने कुछ महीनों तक उसे तलाशा लेकिन अब उसकी तलाश बंद कर दी। पिता गोकुल का कहना है कि उन लोगों ने कई साल थानों के चक्कर काटे। अब थककर घर बैठ गए। बेटी की आज भी याद आती है। न जाने वह किस हाल में होगी।
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केस दो

छह अक्तूबर 2020 को सदर बाजार निवासी अशोक सेन की छोटी बेटी मनीषा (20) अपनी सहेली के साथ बाहर गई थी। उसकी सहेली घर लौट आई लेकिन मनीषा का पता नहीं चला। उसे तलाशने के लिए ऑनलाइन पोर्टल की भी मदद ली गई। पुलिस ने मोबाइल के सीडीआर भी निकाले लेकिन कामयाबी न मिलने पर पुलिस ने केस बंद कर दिया।



यह करती पुलिस

- महिला या किसी अन्य के लापता होने पर उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करना।
- पुलिस उनके पोस्टर हर थाने पर भेजती है।
- सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगवाए जाते हैं।

- डीसीआरबी के जरिये सभी को इसके बारे में जानकारी दी जाती है ताकि गुमशुदा के बारे में कहीं से भी जानकारी मिल सके।
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