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प्लेटफार्म पर जाने की नहीं मिलती अनुमति, यात्री शेड में ही गुजारनी पड़ती है मुसाफिरों को रात

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झांसी। कोरोना काल में प्लेटफार्म पर तय समय में ही जाने की अनुमति मिलने के कारण सैकड़ों मुसाफिरों को रात यात्री शेड में ही गुजारनी पड़ रही है। रात में यात्री शेड मुसाफिरों से ठसाठस भर जाता है। ऐसे में सामाजिक दूरी का भी कोई पालन नहीं कर पाता है। जगह की कमी पड़ने पर कई यात्रियों को रात खुले में बितानी पड़ रही है। आलम यह है कि शौचालय उपयोग के लिए लाइन लगानी पड़ रही है।
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झांसी रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख स्टेशनों में शुमार है। यात्रियों को चारों दिशाओं की ओर यहां से ट्रेनें सुगमता से मिल जाती हैं। कोरोना काल में रेलवे स्टेशन के अंदर ट्रेन आने के पहले ही कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को ही जाने की अनुमति दी जा रही है। रिटायरिंग रूम, वेटिंग रूम, पैसेंजर हॉल, बुकिंग हॉल बंद चल रहे हैं। इस कारण यात्रियों को डेढ़ घंटे पहले बुलाया जाता है, जिसके बाद उनकी थर्मल स्क्रीनिंग होती है। इसके बाद ही उनको अंदर प्रवेश दिया जाता है। वहीं, दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मुसाफिर घंटों पहले ही स्टेशन पर आ जाते हैं। ऐसे मेें उनको सर्दी में रेलवे यात्री शेड में ही वक्त गुजारना परेशानी बना हुआ है। दूसरा, यात्री शेड में अधिकांश गरीब तपके के यात्री समूह में बैठे रहते हैं, इससे दूसरे मुसाफिर वहां जाने से बचते हैं। मजबूरन ऐसे यात्री रेलवे परिसर में खुले में बैठे रहते हैं। स्टेशन पर अलाव का इंतजाम न होने से यात्रियों के लिए पल-पल गुजारना भारी रहता है। शौचालय तक में लाइन लग रही है।
मुझे परिवार के साथ विजयवाड़ा जाना है। रात में ही कानपुर से झांसी आ गया था। रात यात्री शेड में गुजारना भारी पड़ गया है। - अजय।
झांसी से कुशीनगर एक्सप्रेस पकड़कर गोरखपुर जाना है। इस कारण बच्चों के साथ इधर से उधर भटक रहा हूं। ट्रेन की सही जानकारी भी कोई नहीं दे रहा है। - जवाहर।
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सर्दी को लेकर स्टेशन पर कोई इंतजाम नहीं है। यात्री शेड में भीड़ ज्यादा होने के कारण मजबूरन खुले में बैठा हुआ हूं। बड़ी परेशानी हो रही है। - रामप्रताप।
मुझे सुबह के वक्त ट्रेन पकड़नी है। यात्री शेड में भी ठंडी हवा आ रही है। इसको भी पूरी तरह कवर्ड नहीं किया गया है। रात कैसे कटेगी? समझ नहीं आ रहा है। - राजकुमार।
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