झांसी। अंगदान के जरिए दुनिया से जाने के बाद भी कोई किसी के सीने में दिल बनकर धड़क रहा है तो कोई दूसरे की किडनी से अपनी सांसों की डोर थामे हुए है। कई मामलों में तो अपने ही अपने की जान बचाने के लिए आगे आए हैं। झांसी में भी इस तरह के कई उदाहरण हैं। पेश है विश्व अंगदान दिवस पर विशेष रिपोर्ट।
केस-1
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पूर्णिमा के अंगों से चल रही चार लोगों की सांसों की डोर
झांसी। खनिज विभाग में लिपिक रहीं पूर्णिमा श्रीवास्तव ने अपने अंगों को दान कर एक, दो नहीं, बल्कि चार जिंदगियां रोशन कर दीं। सितंबर 2019 में दिल्ली में उनका निधन हो गया था। उन्होंने पहले ही परिवार के सदस्यों से इच्छा जता दी थी कि वह अंगदान करना चाहती हैं। ऐसे में परिजनों ने डॉक्टरों को इसके बारे में जानकारी दी। पूर्णिमा की बेटी अदिति राकेश ने बताया कि उनकी मां का ह्रदय, किडनी और लिवर को दूसरे मरीजों को ट्रांसप्लांट किया गया। एक-एक किडनी 29 और 38 साल की महिला को लगाई गई। जबकि, 40 साल की महिला को चेन्नई में उनका हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। झारखंड के 38 वर्षीय युवक को उनका लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। इस तरह, पूर्णिमा भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, मगर उनके अंगों से चार लोगों की सांसें चल रही हैं।
केस-2
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पति राजकुमार को जरूरत पड़ी गीता ने तुरंत दे दी किडनी
झांसी। मोंठ के किसान राजकुमार यादव (52) की 2019 में किडनी खराब हो गई थीं। दिसंबर से उनकी डायलिसिस शुरू हुई, जो कि मार्च 2020 तक चली। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें किडनी रिप्लेसमेंट की सलाह दी। परिवार के सभी लोग राजकुमार की सेहत को लेकर चिंतित थे, तभी पत्नी गीता यादव ने उनका जीवन बचाने के लिए अपनी एक किडनी देने का फैसला किया। 23 मार्च को उनका किडनी ट्रांसप्लांट होना था, लेकिन कोरोना के मामले बढ़ने और लॉकडाउन के कारण टल गया। बीते आठ अगस्त को उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। राजकुमार का कहना है कि पत्नी की वजह से उन्हें नया जीवनदान मिला है। किडनी खराब होने से जिंदगी बिल्कुल बदल गई थी। सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस के लिए अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे। अब वह सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।
केस-3
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पहले पिता फिर पत्नी ने दीपक को दी अपनी किडनी
झांसी। नंदनपुरा निवासी दीपक रायकवार (36) को नया जीवन देने के लिए पहले पिता आगे आए और फिर पत्नी। दीपक के मुताबिक 2007 में उनकी दोनों किडनी खराब हो गई थी। इसके बाद डॉक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। तब, उनके पिता गंगाराम ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। वर्ष 2011 में दीपक की शादी हुई। 2018 में पिता द्वारा दी गई उनकी किडनी खराब हो गई। डॉक्टर ने फिर से किडनी ट्रांसप्लांट कराने की बात कही। चूंकि, पिता पहले ही एक किडनी दे चुके थे, ऐसे में पत्नी किरण ने पति का जीवन बचाने के लिए अपनी किडनी डोनेट कर दी। दीपक ने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। पिता और पत्नी की वजह से उन्हें नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि वह कामना करते हैं कि हर जन्म में उन्हें ऐसे ही प्यार करने वाले पिता और पत्नी मिले।
केस-4
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सात सालों में पत्नी की किडनी के सहारे चल रहे राजीव
झांसी। ललितपुर के घंटाघर के पास रावरपुरा मुहल्ले निवासी 44 वर्षीय राजीव जैन को भी उनकी पत्नी के कारण नया जीवन मिला है। इलेक्ट्रॉनिक्स के व्यापारी राजीव की 2008 में दोनों किडनी खराब होने पर छह साल तक डायलिसिस चली। बाद में डॉक्टरों ने कहा कि अब डायलिसिस से काम नहीं चलेगा। 2014 में किडनी ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प है। यह सुनते ही राजीव की पत्नी वंदना जैन ने पल भर भी ये कहने में देरी नहीं की कि वह अपनी किडनी डोनेट करेंगी। पिछले साल दिल्ली में उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। राजीव का कहना है कि वे अपनी पत्नी द्वारा दिया नया जीवन जी रहे हैं। पत्नी ने बहुत बड़ा त्याग किया है। पत्नी ने अपना जीवन खतरे में रखकर मेरा जीवन बचाया है। बहुत कम लोग ऐसा करते हैं।