मुंह, गले ही नहीं बुंदेलखंड में किडनी कैंसर के भी मरीज तेजी से सामने आने लगे हैं। हर साल 200 मरीज इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। चूंकि, इस मर्ज में कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी बहुत असरदार नहीं हैं, ऐसे में सर्जरी करके ही किडनी का प्रभावित हिस्सा निकालना पड़ता है। ज्यादातर यह बीमारी तंबाकू के सेवन से होती है, जो कि बुंदेलखंड के लोग काफी अधिक करते हैं।
किडनी का कैंसर के बारे में आमजन को भी बहुत अधिक जानकारी नहीं होती है। चूंकि, बुंदेलखंड में पथरीली जमीन होने की वजह से यहां पथरी के मरीज भी ज्यादा मिलते हैं। ऐसे में कई रोगियों को तो सामान्य अल्ट्रासाउंड के दौरान यह बीमारी पकड़ में आती है। शुरूआती स्टेज में इलाज मिल जाने पर मरीज अपनी पूरी जिंदगी भी जी सकता है। वहीं, बड़ा ट्यूमर हो जाने पर कभी-कभी पूरी किडनी तक निकालनी पड़ जाती है।
चूंकि, बुंदेलखंड के ज्यादातर मरीज झांसी में इलाज कराने के लिए आते हैं। ऐसे में यहां चीरा और लैप्रोस्कोपिक विधि से सर्जरी की जाती है। दिल्ली, भोपाल, इंदौर समेत बड़े महानगरों में अब रोबोटिक विधि से सर्जरी हो रही है। वहीं, अंतिम स्टेज में सर्जरी और कीमोथेरेपी करना संभव नहीं होता है। ऐसे में मरीज को इम्यूनोथेरेपी दी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक विश्व में यह 13वें नंबर का कैंसर है।
महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा होता
किडनी में कैंसर महिलाओं की तुलना में पुरुषों को डेढ़ गुना ज्यादा होने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को किडनी कैंसर की चपेट में आने की आशंका ज्यादा होती है। इसलिए इन्हें कोई भी लक्षण मिलने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह बीमारी कंट्रास्ट सीटी स्कैन से पकड़ में आती है। हालांकि, इस बीमारी की चपेट में युवा भी आते हैं। यदि चार-पांच साल के कम उम्र के बच्चों को ये बीमारी हो जाए तो उन्हें बचाना बेहद मुश्किल होता है।
ऐसे करें पहचान
पेशाब से खून आना, बुखार आना, वजन कम होने लगना व पेट में कोई उबार आ जाए।
ये है रिकवरी दर
स्टेज एक: 98 प्रतिशत पांच साल से अधिक या पूरा जीवन जी सकते।
स्टेज दो: 90 प्रतिशत पांच साल से अधिक या पूरा जीवन जी सकते।
स्टेज तीन: 50 प्रतिशत पांच साल से अधिक जी सकते हैं।
स्टेज चार: पांच साल से ज्यादा जीने की उम्मीद 15 प्रतिशत से कम रह जाती।
ये भी ध्यान दें
- ज्यादातर 65 वर्ष से ऊपर वालों को होती है ये बीमारी।
- पांच साल से छोटे बच्चों को बीमारी होने पर बचाना मुश्किल होता।
- 10 सेंटीमीटर से बड़ा ट्यूमर होने पर पूरी किडनी निकालनी पड़ती।
- एक कोने या सतह या गहराई तक नहीं पहुंचने पर बच जाती किडनी।
- कंट्रास्ट सीटी स्कैन या बढ़ जाने पर अल्ट्रासाउंड से पता चलता है।
- धूम्रपान और मोटापा या फिर अनुवांशिक हो सकता बीमारी का कारण।
हर साल लगभग 50 मरीज किडनी कैंसर के देखता हूं। इनमें 35 प्रतिशत शुरूआत स्टेज वाले होते हैं। शुरूआती स्टेज में ऑपरेशन कराने पर बीमारी से लोग उबर आते हैं और वह अपनी पूरी जिंदगी तक जी सकते हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को डेढ़ गुना ज्यादा होती है। कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी बहुत असरदार नहीं हैं। सर्जरी ही करनी पड़ती है। - डॉ. मनीष जैन, यूरोलॉजिस्ट।
बुंदेलखंड में किडनी कैंसर के हर साल लगभग 200 मरीज मिलते हैं। कई मरीजों में तो सामान्य अल्ट्रासाउंड के दौरान ये बीमारी पकड़ में आती है। बीमारी का मुख्य कारण तंबाकू का सेवन करना है। बड़ा ट्यूमर हो जाने पर कभी-कभी पूरी किडनी तक निकालनी पड़ जाती है। इसलिए लक्षण सामने आते ही तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें।
- डॉ. एके सांवल, वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट।