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जापान की तरह उत्पादन बढ़ाकर खुशी मनाएंगे वर्कशाप कर्मचारी

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झांसी। एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने ने बुधवार को 125 साल का अपना सफर पूरा कर लिया। कोरोना महामारी के चलते कर्मचारियों ने इस क्षण को खुशी में बदलने के लिए जापान के कर्मचारियों की तरह नवंबर में रिकॉर्ड उत्पादन करने का निर्णय लिया है। अभी वर्कशाप प्रशासन के पास हर महीने 675 वैगन मरम्मत कर निकालने का लक्ष्य है।
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भारतीय रेल के लिए सर्वाधिक वैगनों का उत्पादन करने वाला झांसी वैगन मरम्मत कारखाना 25 नवंबर को अपने स्थापना के 125 साल पूरे कर लिए। एशिया महाद्वीप का यह सबसे बड़ा कारखाना है। इस कारखाने को बुंदेलखंड के पहले औद्योगिक इकाई के रूप में जाना जाता है। वर्तमान में कारखाने में साढ़े चार हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। यह कर्मचारी वैगन मरम्मत के लिए बनाई गईं अलग- अलग शॉप में काम करते हैं। कर्मचारी सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक, शाम चार बजे से रात 12 बजे तक व रात बजे से सुबह आठ बजे तक की पालियों में काम करते हैं। रात 12 बजे से सुबह आठ बजे तक अधिकांश काम शंटिंग (वैगनों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने) के होते हैं।
कोरोना महामारी के चलते इस अवसर कारखाने में रंगारंग व अन्य कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए। लेकिन कर्मचारी इस खुशी को जापान के कर्मचारियों की तरह उत्पादन बढ़ाकर मनाने जा रहे हैं। नवंबर में कर्मचारी रिकॉर्ड उत्पादन करने जा रहे हैं।
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निरीक्षण कर कर्मियों को दीं शुभकामनाएं
स्थापना दिवस पर बुधवार को मुख्य कारखाना प्रबंधक एसपी तिवारी ने सभी शॉप का निरीक्षण कर कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं। उनका अलग- अलग शॉप में इंचार्ज सुरेंद्र सिंह यादव, ओहल, रामपाल, जितेंद्र उपाध्याय, रमाकांत दुबे, बीके मिश्रा, मुकेश जैन, अजय शर्मा, विनोद सरावगी, सुनील शर्मा, अखिलेश साहू, फरोख पेटोन, विनोद सविता, नमिता सिजरिया, अशोक कुमार, रवि गुप्ता, रामसुमेर यादव, एसके सान्याल, मोहर मीना, गंगाचरण, जितेंद्र साहू, एसके सक्सेना, प्रमोद कुमार, नवीन शुक्ला, राकेश, दान सिंह ने स्वागत किया। इस मौके पर मधुसूदन सिन्हा, शिवशंकर सिंह, आफाक अहमद मौजूद रहे।
हर महीने तैयार होते हैं औसत 675 वैगन
रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में वैगन मरम्मत के लिए वेल्डिंग, पेंटिंग, एसएसई यार्ड, एसएसई रीहेब, बीडब्लूआर, पावर हाउस, मिड नाइट, धातुशाला, व्हील, मशीन, आर बी फर्स्ट, सेकेंड, थर्ड, एयर ब्रेक लैब, टूल रूम समेत बाइस शॉप हैं। इन शॉपों में साढ़े हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। मरम्मत के लिए देश भर से यहां वैगन भेजे जाते हैं। यहां अभी एक माह में छह सौ पचहत्तर वैगनों की मरम्मत की जाती है।
तीस वर्ष होती है एक वैगन की उम्र
मालगाड़ी के एक वैगन की उम्र तीस वर्ष तक होती है, इसके बाद उसे कंडम घोषित कर दिया जाता है, लेकिन देखा गया है कि वैगन इतने समय तक चल नहीं पाता है। मौसम व अन्य कारणों से वैगनों का पूरी उम्र तक चल पाना संभव नहीं हो पाता है। रेलवे को एक वैगन पंद्रह से बीस लाख की कीमत का पड़ता है। समय से पहले वैगन के कंडम होने से रेलवे को हर साल करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ता है।
सीडब्लूएम को किया सम्मानित
झांसी। रेलवे कारखाना के 125 साल पूरे होने पर मुख्य कारखाना प्रबंधक एसपी तिवारी को सम्मानित कर बधाई दी गई। इस मौके पर रेलवे स्टेशन सलाहकार समिति के सदस्य सियाराम शरण चतुर्वेदी, नरेश मिश्रा, जहीर कुरैशी, नरेंद्र राजोरिया, संदीप साहू, अमित पांडे, राहुल साहू मौजूद रहे।
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