झांसी। प्रशासनिक सुस्ती नगर निगम की जमीन पर अवैध दुकानें बनाए जाने को हवा दे रही है। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगर निगम ने एसडीएम सदर को 28 जून को जमीन की नापजोख करने के लिए पत्र भेजा था, लेकिन उसमें नापजोख के लिए 15 जुलाई तिथि तय की गई थी। उधर, दिन में दुकानों का काम बंद रहता है और जनरेटर के शोर में रात में निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे पूरा मामला पेचीदा नजर आ रहा है।
सिविल लाइन में चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति के पीछे स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क पर आराजी संख्या 219, 220 और 221 पर दुकानों का निर्माण कार्य चल रहा है। नगर निगम की जमीन पर दुकानों का निर्माण करने की सुगबुगाहट शुरू होने पर नगर निगम ने एसडीएम सदर को पत्र लिखकर कहा था कि कुछ दबंग व्यक्तियों द्वारा सरकारी पटरी पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। उक्त क्षेत्र संवेदनशील होने के कारण 15 जुलाई को किसी सक्षम मजिस्ट्रेट की तैनाती करने तथा राजस्व टीम और पर्याप्त पुलिस बल भेजा जाए। उधर, रातोंरात दुकानों का निर्माण कार्य चल रहा है।
दस्तावेजों में 28 मीटर चौड़ी है सड़क
सरकारी दस्तावेजों में सड़क के मध्य से दोनों ओर 14-14 मीटर की जगह दर्ज है। इस तरह दस्तावेजों में उक्त सड़क करीब 28 मीटर चौड़ी है। हालांकि, यह बात अलग है कि मौके पर 28 मीटर जगह नहीं है।
पांच को दी गई थी निर्माण रुकवाने की सूचना
इलाइट पुलिस चौकी के निलंबित उपनिरीक्षक लोकेंद्र त्रिपाठी ने पांच जुलाई को नगर निगम के संपत्ति अधिकारी को अवैध कब्जा की रिपोर्ट दे दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि जमीन पर भवन स्वामियों द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण को रोके जाने और यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश देने के बाद भी नगर निगम के पार्षदों द्वारा चोरी छिपे रात में अवैध निर्माण किया जा रहा है, जबकि काम रोकने की सूचना पूर्व में दे दी गई है। 15 जुलाई को जमीन के सीमांकन का आदेश है, ऐसे में अवैध निर्माण रुकवाया जाए। पुलिस की रिपोर्ट मिलने के बाद भी नगर निगम प्रशासन 15 जुलाई का इंतजार कर रहा है, ताकि निर्माण कार्य पूरा हो जाए।
कटघरे में निगम प्रशासन
अवैध दुकानों के निर्माण को लेकर जिस तरह से हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है और अब तक जो कार्रवाई की गई है, उसके हिसाब से नगर निगम प्रशासन कटघरे में आ गया है। एक ओर तो दावा किया जा रहा है कि नगर निगम की जमीन पर अवैध निर्माण चल रहा है, इसकी रिपोर्ट और सूचना भी पुलिस को दी जा रही है, लेकिन दूसरी ओर नगर निगम के संपत्ति अधिकारी केशव प्रसाद ने पत्र में 15 जुलाई को प्रात: दस बजे उक्त जमीन का सीमांकन करने की बात कही थी। जाहिर है कि जब, अवैध निर्माण किया जा रहा हो तो करीब 17 दिन बाद का समय नापजोख के लिए मांगना अपने आप में सवाल पैदा करता है।
लगता है कि मथुरा के जवाहर बाग कांड से अधिकारियों ने सबक नहीं लिया है। भूमाफियाओं द्वारा चंद्रशेखर आजाद प्रतिमा के पास, मेडिकल कालेज स्थित पहाड़, वार्ड नंबर तीन में शौचालय तथा कांशीराम पार्क के सामने की जमीन पर कब्जा करने की लगातार सूचनाएं आ रही हैं। इन अवैध कब्जों की जानकारी नगर आयुक्त व सभी अधीनस्थों को है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, इससे नगर निगम की छवि धूमिल हो रही है। नगर आयुक्त को चाहिए कि वह कड़ी कार्रवाई करें।
- किरन राजू बुकसेलर
महापौर