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करंट से मां-बेटे समेत चार की मौत

Tue, 12 Jul 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी/मोंठ। सोमवार को जिले के अलग-अलग स्थानों पर करंट लगने से मां-बेटे समेत चार लोगों की मौत हो गई। मोंठ तहसील के सेरसा गांव में कूलर में आए करंट ने मां-बेटे की जान ले ली। शाहजहांपुर में मोटर का तार जोड़ते समय करंट लगने से किसान की मौत हो गई। वहीं, बरुआसागर क्षेत्र के ग्राम धवारा में घर में करंट दौड़ने से एक युवक की जान चली गई।
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थाना पूंछ क्षेत्र के ग्राम सेरसा में सोमवार को सुबह करीब 11 बजे योगेंद्र सिंह पटेल की पत्नी उमा (32) एवं पुत्र आयुष (10) घर पर थे। योगेंद्र गांव में गए हुए थे। गर्मी के कारण उमा ने कूलर चालू किया, उसी समय उसे बिजली का करंट लगा और वह कूलर से चिपक गई। मां को करंट लगा देख आयुष ने उसे पकड़ कर खींचने की कोशिश की, जिससे आयुष भी करंट की चपेट में आ गया। करंट से उमा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आयुष गंभीर रूप से झुलस गया। घायल को उपचार के लिए मोंठ अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। योगेंद्र के परिवार में उसके अलावा एक पुत्री आकांक्षा (13) ही बची है।

शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के ग्राम खजूरी में सेवाराम कुशवाहा का पुत्र हरप्रसाद (30) सोमवार को अपने खेत में धान की पौध में पानी दे रहा था। हरप्रसाद की पत्नी उर्मिला भी साथ थी। सुबह करीब छह बजे पानी देते समय मोटर का तार टूट गया, जिसे हरप्रसाद जोड़ने लगा। तार जोड़ते समय अचानक  करंट आ गया और हरप्रसाद डोरी से चिपक गया। हरप्रसाद को डोरी से चिपका देखकर उर्मिला ने खेत पर पड़े झांकर उठाकर डोरी को तोड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन डोरी नहीं टूटी। कुछ देर तक हरप्रसाद डोरी से ही चिपका रहा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पति को बचाने के प्रयास में उर्मिला भी झुलस गई।
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बरुआसागर थाना क्षेत्र के ग्राम धवारा में सोमवार सुबह एक साथ कई घरों में करंट दौड़ने से हड़कंप मच गया। करंट दौड़ने के बाद खंभे पर तारों में ब्लास्ट हुआ और बिजली चली गई। करंट की चपेट में आने से सोनू (18) पुत्र स्व रमेश की मौत हो गई। जबकि, पड़ोस में रहने वाले नूर बख्श का पुत्र आशिक (6) झुलस गया। हादसे के बाद दहशत में आए गांव के लोग इकट्ठा हो गए। नूरबख्श के परिजन आनन-फानन में आशिक को लेकर मेडिकल कॉलेज आ गए। यहां उसका उपचार चल रहा है।

घर का इकलौता चिराग बुझा
सोनू घर का एकलौता चिराग था। उसके पिता रमेश की छह साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। उसकी व चार बहनों का भरण पोषण मां कर रही थी। उसकी मौत से अभागी मां का बुढ़ापे का एकमात्र सहारा भी छीन गया।
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