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पटरियां मिलीं, कंपनी ने भी शुरू किया काम

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पटरियां मिलीं, कंपनी ने भी शुरू किया काम
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झांसी। झांसी-कानपुर डबल ट्रैक का काम अब तेजी पकड़ने लगा है। डबल ट्रैक के लिए पटरियां मिलना शुरू हो गई हैं। साथ ही, चीन की कंपनी ने भीमसेन से ऊसरगांव स्टेशन के बीच अधूरा काम पूरा करना शुरू कर दिया है। अभी तक 206 किलोमीटर के इस रेल लाइन पर 51 किलोमीटर पटरी बिछाने का काम पूरा होने के बाद उस पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया है। जबकि, वित्तीय सत्र 2019- 20 में 34 किलोमीटर पटरी बिछाने का लक्ष्य दिया गया है।
झांसी-कानपुर डबल ट्रैक में 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। अभी तक 51 किलोमीटर रेल लाइन का काम ही पूरा हो सका है। इसमें झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर और पिरौना- एट व भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर रेल लाइन बनकर तैयार हो चुकी है। इस पर ट्रेनें दौड़ने लगी हैं। अगले चरण में पारीछा से नंदखास और उरई के नजदीक स्थित सरकोजी से ऊसरगांव स्टेशन के बीच दूसरी लाइन तैयार होनी है। इन स्टेशनों के बीच की दूरी 34 किलोमीटर है और इस काम को मार्च 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। मगर, रेल पटरी बनाने वाले भारत सरकार के उपक्रम स्टील अर्थोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) से नई पटरी नहीं मिल पा रही थीं। इससे काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा था। लेकिन अब सेल से बीस किलोमीटर के लिए पटरियां मिल गईं हैं।
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साथ ही, ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया था, लेकिन यह कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गई। छूटे काम को चीन की चाइना रेल कंपनी डी 21 और हैदराबाद की श्री श्री निवासन कंस्ट्रक्शन कंपनी पूरा कर रही है। इस कंपनी ने भी अब अपना काम शुरू कर दिया है।
मालूम हो कि अभी झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है। सबसे ज्यादा ट्रेनों को झांसी आने के पहले मुस्तरा स्टेशन पर रोका जाता है। यही कारण है कि कानपुर से आने वाली अधिकांश ट्रेनें समय पर झांसी नहीं आ पाती हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। दूसरे ट्रैक से अब संबंधित सेक्शन में तेजी से ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।
‘पटरी न मिलने की समस्या दूर हो गई है। सेल से 20 किलोमीटर के लिए नई पटरियां मिल गई हैं। साथ ही ऊसरगांव से भीमसेन के बीच पड़ा अधूरा काम भी शुरू हो गया है। नए वित्तीय सत्र में 34 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने का लक्ष्य दिया गया है। ’
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कमल कुमार, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, आरवीएनएल।
पांच साल में 51 किलोमीटर हो सका पूरा
रेल बजट 2013-14 में झांसी-कानपुर दूसरी रेल लाइन के लिए 817 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें झांसी-भीमसेन के बीच 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। यह काम तीन कंपनियों को सौंपा। झांसी से एरच रोड स्टेशन (66 किलोमीटर) तक 265 करोड़ रुपये का काम मुंबई की कंपनी जीएमआर और एरच रोड से ऊसरगांव (70 किलोमीटर) तक 288 करोड़ रुपये का काम बंगलूरू की कंपनी केईसी कर रही है। ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया था, लेकिन यह कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गई। छूटे काम को चीन की चाइना रेल कंपनी डी 21 और हैदराबाद की श्री श्री निवासन कंस्ट्रक्शन कंपनी पूरा कर रही है। डबल ट्रैक को पूरा करने का लक्ष्य जून -2018 तय किया गया था। मगर, अभी तक 51 किलोमीटर ट्रैक का काम ही पूरा हो सका है।
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