झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या दो ओमवीर की अदालत ने महिला की हत्या में दोष सिद्घ होने पर एक अधिवक्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पचास हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी देवेंद्र पांचाल के अनुसार टीकमगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने बड़ागांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री की शादी टीकमगढ़ जिले में रहने वाले एक युवक से हुई थी। शादी के एक साल बाद ही पति परेशान करने लगा। पुत्री ने टीकमगढ़ न्यायालय में केस कर दिया था। इसी बीच उसकी मुलाकात झांसी के थाना बड़ागांव क्षेत्र निवासी अधिवक्ता राघवेंद्र राजौरिया से हो गई थी। केस की पैरवी के चलते अधिवक्ता ने उसकी पुत्री से संबंध बना लिए। इसके बाद बड़ागांव लाकर पत्नी के रूप में रख लिया। समय बीतने के बाद दोनों के बीच केस की पैरवी व गाड़ी को लेकर झगड़ा होने लगा।
13 जनवरी 2014 को पिता ने घर जाकर दोनों को समझाया, लेकिन बात नहीं बनी। 14 जनवरी को खबर मिली कि उसकी पुत्री जली अवस्था में मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। परिजन भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। पुत्री ने बयान में बताया कि राघवेंद्र ने उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने राघवेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान मंगलवार को दोष सिद्घ होने पर अदालत ने दोषी पाए जाने पर अभियुक्त राघवेंद्र को हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अपहरण व दुष्कर्म के मामले में जमानत खारिज
झांसी। विशेष न्यायालय पॉक्सो व स्पेशल जज पॉक्सो अभय श्रीवास्तव की न्यायालय से नाबालिग के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत खारिज की है।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो चंद्रप्रकाश शर्मा के अनुसार थाना सकरार निवासी एक व्यक्ति ने 4 जुलाई 2020 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग पुत्री को 13 जून को नरेश उर्फ गोलू भगाकर दिल्ली ले गया था। जहां उसके साथ दुष्कर्म किया था। पुलिस ने दोनों को बरामद कर आरोपी को जेल भेज दिया था। मंगलवार को अभियुक्त की ओर से जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया। जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।