बाहर ही नहीं, बल्कि घर की चहारदीवारी के भीतर भी महिलाएं असुरक्षित हैं। यहां वह अपनों के बीच घरेलू हिंसा का शिकार हैं। हालांकि, इस पर शासन - प्रशासन का रुख सख्त है। बावजूद, जिले में घरेलू हिंसा के मामलों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसका अंदाजा जिला प्रोबेशन कार्यालय में आने वाले मामलों को देखकर लगाया जा सकता है।
सरे राह महिलाओं के साथ छेड़खानी की घटनाएं आम हैं। बलात्कार, मारपीट आदि के मामले भी आए दिन सामने आते रहते हैं। महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगह उनका घर माना जाता है। लेकिन, महिलाएं अपने घर में अपनों के बीच भी सुरक्षित नहीं हैं। कड़े कानून और शासन - प्रशासन के सख्त रुख के बाद भी घरेलू हिंसा के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसका अंदाजा जिला प्रोबेशन कार्यालय में आने वाले मामलों को देखकर लगाया जा सकता है। विभिन्न न्यायालयों से साल 2013 - 14 में यहां 50 से भी कम मामले आए थे। जबकि, वर्ष 2014 - 15 में यहां घरेलू हिंसा के 235 मामले दर्ज किए गए। चालू वित्तीय वर्ष 2015 - 16 के दो माह अप्रैल व मई में प्रोबेशन कार्यालय में 72 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनकी जांच जारी है।
यह है घरेलू हिंसा
झांसी। स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन व अंगों को मानसिक या शारीरिक हानि पहुंचाना या संकट उत्पन्न करना घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के दायरे में आता है। इसके तहत शारीरिक, लैंगिक, मौखिक, भावनात्मक व आर्थिक दुरुपयोग कारित करना भी है। इसके अलावा दहेज या अन्य संपत्ति की पूर्ति के लिए उत्पीड़न करना भी घरेलू हिंसा है।
केस - 1
दहेज की खातिर घर से निकाला
झांसी। थाना कटेरा क्षेत्रांतर्गत निवासी शबनम (काल्पनिक नाम) की शादी साल 2010 में हुई थी। शादी में उसके पिता ने हैसियत के अनुसार दहेज दिया था। लेकिन, शादी के एक साल बाद ही ससुराली दो लाख रुपये की मांग करने लगे। न देने पर शबनम को घर से निकाल दिया। शबनम वापस अपनी ससुराल जाना चाहती है, परंतु ससुराली बगैर दो लाख रुपये के महिला को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
केस - 2
गर्भपात कराकर घर से निकाला
झांसी। जनवरी माह में एक युवती को एक युवक उसके घर से फुसला कर ले गया था। बाद में दोनों ने मंदिर में विवाह कर लिया था। लेकिन, शादी के कुछ दिनों बाद ही पति व अन्य ससुराली पांच लाख रुपये की मांग करने लगे। इस दौरान महिला के गर्भ ठहर गया, जिसे जबरदस्ती गिरवा दिया गया। अब महिला को घर से निकाल दिया गया है। बेसहारा महिला दर - दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
‘महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। महिलाओं को उत्पीड़न पर चुप्पी नहीं साधनी चाहिए, बल्कि इसका मुखर विरोध करना चाहिए। इसकी रोकथाम के लिए कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं।’
- राजीव शर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकारी